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Himachal News: हिमाचल में घटेगा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों का कैडर, केंद्र को लिखा पत्र

Tue, 18 Aug 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों का कैडर कम किया जाएगा। राज्य सरकार ने आईएएस काडर 153 से घटाकर 130 और आईएफएस का 118 से 83 करने का फैसला किया है।
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हिमाचल में घटेगा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों का कैडर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों का कैडर कम किया जाएगा। राज्य सरकार ने आईएएस काडर 153 से घटाकर 130 और आईएफएस का 118 से 83 करने का फैसला किया है। इसी तरह आईपीएस का कैडर भी 96 अधिकारियों से कम किया जाएगा। राज्य सरकार ने अधिकारियों का कैडर कम करने के लिए केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग को पत्र भेजा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में अफसरों की संख्या कम करेगी। इससे एक अधिकारी पर करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होगी। जितने अधिकारी कम करेंगे, सरकार के उतने ज्यादा पैसे बचेंगे। उस पैसे से लोगों की सेवा कर सकेंगे।

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अधिकारियों की फौज की जरूरत नहीं है: सीएम
सोमवार को ओकओवर शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में सीएम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को अधिकारियों की फौज की जरूरत नहीं है। सरकार में उतने ही अधिकारी होने चाहिएं, जितने जरूरी हों और जो सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। वह व्यक्तिगत तौर पर आईएएस अधिकारियों की संख्या घटाकर 100 या 110 तक रखना चाहते हैं। कुछ आईएएस अधिकारियों की नाखुशी को देखते हुए फिलहाल यह संख्या 130 तक रखने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ अधिकारी ऐसा भी मान रहे हैं कि उनके पास पर्याप्त काम नहीं है, ऐसे में उनका टैलेंट भी खराब हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों की संख्या कम करने का उद्देश्य प्रशासनिक खर्च घटाने के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना है।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए तुरंत कर रहे रिलीव
सीएम ने कहा कि प्रशासनिक खर्च कम करने के लिए फील्ड अफसरों के लिए उपलब्ध 56 गाड़ियों की संख्या घटाकर 30 की जाएगी। सरकार सभी सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों की फाइलें रोक दी जाती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं किया जा रहा है। प्रतिनियुक्ति के लिए अधिकारियों को तुरंत मंजूरी दी जा रही है। उन्हें रिलीव भी किया जा रहा है। सबसे ज्यादा मंजूरी दिल्ली जाने के लिए दी जा रही है।

25 आईएएस और 24 आईपीएस अफसर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर
हिमाचल प्रदेश कैडर के 25 आईएएस अधिकारी केंद्र सरकार में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें अनुराधा ठाकुर, भरत हरबंस लाल खेड़ा, मनीष गर्ग, डॉ. रजनीश, सुभाशीष पंडा, अमनदीप गर्ग, पुष्पेंद्र राजपूत, मीरा मोहंती, प्रियतु मंडल, कदम संदीप बसंत, मानसी सहाय ठाकुर, रोहन चंद ठाकुर, ललित जैन, ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर, डॉ. रिचा वर्मा, पंकज राय, हरिकेश मीणा, देवश्वेता बनिक, कृतिका कुलहरी, आशुतोष गर्ग, अरिंदम चौधरी और निधि पटेल शामिल हैं। इसके अलावा निपुण जिंदल, विवेक भाटिया और राकेश कुमार प्रजापति हाल ही में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए हैं। इसी तरह 24 आईपीएस अधिकारी भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। हिमाचल कैडर के 118 आईएफएस अधिकारियों में से 17 केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं।

बसों की संख्या के हिसाब से होंगे आरएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि एचआरटीसी में रीजनल मैनेजर की तैनाती क्षेत्रवार नहीं, बल्कि बसों की संख्या के हिसाब से की जाएगी। प्रशासनिक ढांचे को जरूरत के अनुसार व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में ड्राइवरों और कंडक्टरों की जरूरत है। जब फ्लीट कम होगी तो खुद ही युक्तिकरण होगा।
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आईएएस-आईपीएस का कैडर घटाकर 200 करोड़ बचाने का दावा जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा: राकेश जमवाल
भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों का कैडर घटाने के प्रदेश सरकार के फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं, वित्तीय कुप्रबंधन और कथित भ्रष्टाचार से जनता का ध्यान भटकाने के लिए छोटे-छोटे फैसलों को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। सरकार का यह रवैया नाखून कटाकर शहीद होने जैसा है। राकेश जमवाल ने कहा कि इससे भी गंभीर विषय यह है कि हिमाचल के अनेक वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकार इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था के कारण प्रशासनिक तंत्र में घुटन का वातावरण बनता जा रहा है।  राकेश जमवाल ने कहा कि एक तरफ सरकार 100 या 200 करोड़ रुपये बचाने के दावे कर रही है, दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल पर टैक्स और सेस बढ़ाकर जनता पर लगातार आर्थिक बोझ डाल रही है। बिजली, पानी, राशन, बस किराया, सीमेंट और स्टांप ड्यूटी सहित अनेक मदों में जनता का खर्च बढ़ा है।  उन्होंने कहा कि महंगाई और टैक्स के माध्यम से जनता की जेब से पैसा निकालकर फिर 200 करोड़ रुपये की कथित बचत का प्रचार करना आर्थिक सुधार नहीं बल्कि आंकड़ों की बाजीगरी है।
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