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Bilaspur News: पनोह में बनेगा वन्यजीव बचाव केंद्र, वन विभाग सरकार को भेजेगा प्रस्ताव

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फोरलेन के पास पांच से छह बीघा जमीन पर केंद्र बनाने की योजना,घायल वन्यजीवों को उपचार के लिए शिमला ले जाने की मजबूरी होगी कम
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अनिल ठाकुर
बिलासपुर। मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क हादसों में घायल होने वाले वन्यजीवों को समय पर उपचार उपलब्ध करवाने के लिए बिलासपुर के पनोह में वन्यजीव बचाव केंद्र बनाने की योजना है। वन विभाग इस संबंध में राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है। फोरलेन के पास विभाग की जमीन पर पांच से छह बीघा क्षेत्र में केंद्र बनाने की योजना है। यहां रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को रखने, उनके उपचार और सुरक्षित परिवहन की सुविधाएं विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
केंद्र बनने से तेंदुए के साथ संघर्ष की घटनाओं और वाहनों की चपेट में आने से घायल होने वाले सांभर सहित अन्य वन्यजीवों को राहत मिल सकती है। पनोह में फोरलेन के पास विभाग का करीब 90 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। इसमें से पांच से छह बीघा जमीन पर बचाव केंद्र बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसे वन मंडल अधिकारी बिलासपुर के माध्यम से शिमला भेजा जाएगा। फिलहाल योजना प्रस्ताव के स्तर पर है। केंद्र के निर्माण और सुविधाओं को लेकर अंतिम निर्णय सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
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वन विभाग के सामने वन्यजीवों को बचाने के साथ रेस्क्यू के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की चुनौती भी रहती है। सांभर कई बार सड़कों पर आकर वाहनों से टकरा जाते हैं और घायल हो जाते हैं। ऐसे मामलों में उन्हें तत्काल सहायता और उपचार की जरूरत होती है। इसी तरह तेंदुए के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने या मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बनने पर भी रेस्क्यू टीम को मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करनी पड़ती है।
अभी घायल वन्यजीवों को उपचार के लिए कई बार शिमला के टूटीकंडी स्थित केंद्र तक ले जाना पड़ता है। ऐसे में परिवहन के लिए उपयुक्त वाहन और अन्य व्यवस्थाओं की जरूरत होती है। बिलासपुर में ही बचाव केंद्र बनने से स्थानीय स्तर पर रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को रखने और उपचार उपलब्ध करवाने में मदद मिल सकती है। पनोह में फोरलेन के नजदीक केंद्र बनाने से बिलासपुर और मंडी की ओर आवाजाही भी सुविधाजनक रहेगी। वन परिक्षेत्र अधिकारी घुमारवीं का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे नरेंद्र सिंह दयाल ने बताया कि केंद्र के लिए जगह उपलब्ध होने से जरूरी सुविधाएं विकसित करने का रास्ता खुल सकता है। पनोह में विभाग की जमीन के एक छोटे हिस्से का इस्तेमाल करने की योजना है। फिलहाल प्रस्ताव तैयार कर डीएफओ के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा जाना है। सरकार की मंजूरी और आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही केंद्र के निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। संवाद
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विशेषज्ञ पशु चिकित्सक और रेस्क्यू वाहन भी जरूरी
वन्यजीव बचाव केंद्र के साथ रेस्क्यू के लिए विशेष वाहन और विशेषज्ञ पशु चिकित्सक की उपलब्धता भी जरूरी है। कई बार वन्यजीवों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए बेहोश करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में दवा की सही मात्रा तय करना महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञ पशु चिकित्सक की निगरानी के बिना दवा की अधिक मात्रा वन्यजीव की जान के लिए खतरा बन सकती है। विशेषज्ञ चिकित्सक और उचित संसाधन उपलब्ध होने से ऐसे जोखिम को कम किया जा सकता है।
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