-12 दिसंबर को मनाया जाएगा विरोध दिवस
-कांग्रेस सरकार बनते ही मनरेगा मजदूरों को लाभों से किया वंचित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की ओर बंद किए मजदूरों के पंजीकरण और सहायता पर रोक के खिलाफ वीरवार को घुमारवीं में सभी ट्रेड यूनियन की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी यूनियन सरकार के खिलाफ मिलकर विरोध प्रदर्शन करेंगी। 12 दिसंबर को विरोध दिवस मनाया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता इंटक नेता जगत राम ने की।
उन्होंने बताया कि पिछले साल 11 दिसंबर को कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी और अगले ही दिन 12 दिसंबर को जारी अधिसूचना के बाद मनरेगा मजदूरों को बोर्ड का सदस्य बनने और उन्हें बोर्ड के लाभों से वंचित किया गया है जो अभी तक भी जारी है। इसके बाद 8 फरवरी को सरकार द्वारा अधिसूचना के तहत निर्माण मजदूरों को पंजीकरण के लिए संबंधित निर्माण कार्य में सेस अदायगी के बारे में प्रमाणपत्र देने की शर्त लगा दी है और साथ में ही पंजीकृत निर्माण यूनियनों को रोजगार प्रमाणपत्र जारी करने से वंचित कर दिया है। इन सब फैसलों से वर्तमान में बोर्ड का काम बंद पड़ा है। यूनियन इसका विरोध कर रही है। अब सभी मजदूर यूनियन एकजुट हुईं और इसके खिलाफ संयुक्त रूप में आंदोलन करने और बोर्ड और सरकार के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का निर्णय लिया गया। इस दौरान संयुक्त एक्शन कमेटी का गठन किया गया, जिसका संयोजक भूपेंद्र सिंह और सह संयोजक रूपसिंह, प्रदीप कुमार, जगदीश भारद्वाज, रविंद्र रवि और संत राम को चुना गया। उन्होंने बताया कि इस 12 दिसंबर को विरोध दिवस मनाया जाएगा और हर गांव और पंचायत स्तर पर इस अधिसूचना की प्रतियां सार्वजनिक तौर पर जलाई जाएंगी। संयुक्त रूप में बोर्ड की कार्यप्रणाली के बारे में 23 दिसंबर को हर जिले से मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री और बोर्ड के अध्यक्ष को ज्ञापन भी प्रेषित किए जाएंगे। यदि उसके बाद भी बात नहीं सुनी तो जनवरी के अंत में संयुक्त प्रदर्शन और विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव किया जाएगा। इस मौके पर बाबा हरदीप सिंह, सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, रूपचंद, संजय सैनी, जगतार सिंह, विना शर्मा, कमलेश कुमारी, बीएमएस के प्रदीप कुमार, मंगत राम नेगी, राजू भारद्वाज, जोगिंदर कुमार और अशोक कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।