सुंगल गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आरती करते हुए श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक।
-सुंगल गांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के सुंगल गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को श्री कृष्ण और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया, इसी के साथ कथा का समापन हो गया। इस दौरान दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।
समापन अवसर पर आचार्य पंडित संजय शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण और विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि किस प्रकार रुक्मिणी की अटूट श्रद्धा और विश्वास के कारण भगवान श्रीकृष्ण ने उनका हरण कर उनसे विवाह किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि सच्चे मन से की गई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती और भगवान अपने भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं। आचार्य ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मात्र ही जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करने में सक्षम है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से मिलजुल कर रहने, आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में जीवन समर्पित करने से मनुष्य के समस्त दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति व समृद्धि का आगमन होता है। इस धार्मिक आयोजन का संचालन कुलदीप डोगरा और सरोज डोगरा ने किया। समापन अवसर पर शंखनाद, पुष्प वर्षा और जयकारों के बीच आचार्य संजय शास्त्री व उनकी टीम को सम्मान पूर्वक विदाई दी गई। श्रीमद्भागवत महापुराण का भी विधि पूर्वक पूजन कर विसर्जन किया गया। प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ।