बिलासपुर मुख्य बाजार में वन विभाग की कार्रवाई
देशी तोतों का व्यापार, खरीद-फरोख्त, पिंजरे में रखना कानूनन अपराध
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के मुख्य बाजार में बुधवार को वन विभाग ने कार्रवाई की। इस दौरान अवैध रूप से पिंजरों में कैद देसी पैराकीट (तोते) को मुक्त कराया गया। वन विभाग की टीम ने इन संरक्षित पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया।
यह कार्रवाई वन परिक्षेत्र अधिकारी सदर नरेंद्र सिंह दयाल के नेतृत्व में हुई। निरीक्षण के दौरान मुख्य बाजार क्षेत्र में कई देसी पैराकीट पिंजरों में बंद मिले थे। टीम ने तत्काल इन पक्षियों को मुक्त कराया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की। वन विभाग ने स्पष्ट किया कि भारत के सभी देसी तोते और पैराकीट संरक्षित वन्यजीव हैं। ये वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत आते हैं। इन पक्षियों को पकड़ना, खरीदना, बेचना या कैद रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह कानूनन दंडनीय अपराध है, जिसके लिए सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक का कारावास या एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दोनों सजाएं भी एक साथ दी जा सकती हैं।
वहीं, वन विभाग ने आम लोगों से देसी तोतों को पालतू न रखने की अपील की है। विभाग ने कहा कि किसी भी पैराकीट को पालतू के रूप में न रखा जाए। यदि इनके अवैध व्यापार, बिक्री या कैद की जानकारी मिले, तो तुरंत सूचित करें। सूचना निकटतम वन कार्यालय या वन विभाग को दी जा सकती है। इससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
नरेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में वन्यजीव संरक्षण अभियान जारी रहेंगे। भविष्य में भी विशेष अभियान चलाए जाएंगे। अवैध रूप से वन्यजीवों को पकड़ने, बेचने या कैद रखने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। विभाग ने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है और इसमें सभी का सहयोग अपेक्षित है।