शुगर वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या, सभी उम्र के लोगों में बढ़ रहा जोखिमनियमित व्यायाम करें, शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं, अच्छी नींद लें
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शुगर वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इसका जोखिम सभी उम्र के लोगों में बढ़ता जा रहा है। यह बड़ों से लेकर बच्चों तक में फैल रही है। डायबिटीज की स्थिति तब बनती है, जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता। हृदय रोग, गुर्दे की समस्या, स्ट्रोक जैसी क्रॉनिक बीमारी से प्रभावित लोगों के लिए कई स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती है।
होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. ऋतिक ने लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए बताया कि गड़बड़ाती जीवनशैली से मांसपेशियों को नुकसान होता है, जो इंसुलिन प्रतिरोध की वजह बन सकता है। आनुवांशिकता के साथ जीवनशैली और आहार में गड़बड़ी को डायबिटीज के जोखिमों को बढ़ाने वाला माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मधुमेह के कई जोखिम कारक हो सकते हैं, तनाव की समस्या भी इसमें से एक है। यानी कि अगर आप अधिक तनाव लेते हैं तो इसके कारण भी डायबिटीज होने का खतरा अधिक हो सकता है। बताया कि मधुमेह और तनाव का पारस्परिक संबंध हो सकता है। अगर आप अधिक तनाव में रहते हैं तो इसके कारण डायबिटीज को कंट्रोल कर पाना भी कठिन हो सकता है। तनाव की स्थिति में कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज होता है जो ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाने वाली हो सकती है। इसके अलावा तनाव की स्थिति में इम्युनिटी सिस्टम भी कमजोर हो जाती है। इसके कारण डायबिटीज की जटिलताओं के विकसित होने का जोखिम भी अधिक हो सकता है। एक अध्ययन में पता चला है कि तनाव की समस्या लोगों को कई तरह से प्रभावित कर सकती है। तनाव की स्थिति को प्रतिबंधित करने के तरीकों को पालन में लाकर मधुमेह के रोगी अपने रक्त शर्करा में सुधार कर सकते हैं।
नियमित व्यायाम, माइंडफुलनेस, शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर स्ट्रेस की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है। नींद की गुणवत्ता को बढ़ाने से मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन संवेदनशीलता दोनों में सुधार होता है जो मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को कंट्रोल करने में भी लाभकारी हो सकती है। कहा कि शुगर के मरीजों के लिए व्यायाम करना, धूप सेंकना, फाइबर से भरपूर चीजें खाना, ग्रीन टी और ब्लैक कॉफी का सेवन भी फायदेमंद है।