भराड़ी (बिलासपुर)। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा स्तर सुधारने के दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। विकास खंड घुमारवीं की राजकीय प्राथमिक पाठशाला बाह रणौता में एक भी शिक्षक नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि ऐसे में बच्चों का भविष्य कैसे उज्जवल होगा। इसके कारण बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों का की पढ़ाई पर संकट मंडराने लगा है।
बता दें कि दिसंबर 2020 में राजकीय प्राथमिक पाठशाला बाह-रणौता के मुख्य अध्यापक का तबादला दूसरी पाठशाला में हो गया। दूसरे अध्यापक मार्च 2021 में सेवानिवृत्त हो गए हैं। मार्च 2021 से लेकर आज तक अध्यापकों के दो पद खाली पड़े हैं। बच्चों के परिजन परेशान हैं। एक तरफ सरकार कहती है कि स्कूल में बच्चों की तादाद बढ़ाओ और दूसरी तरफ पाठशाला में स्टाफ ही नहीं है।
बच्चों के परिजनों और पूर्व प्रधान सुरेश कुमार ने सरकार से मांग की है कि खाली पड़े अध्यापकों के पदों पर नियुक्तियां की जाएं वरना धरना प्रदर्शन करने को विवश होंगे।
एसएमसी की प्रधान कुसुम लता, अभिभावकों सुनील कुमार, महेंद्र सिंह, प्रताप चंद, राजकुमार, कुलदीप कुमार, आशा देवी, राजेश कुमार, पूनम कुमारी का कहना है कि प्राथमिक स्कूल बाह रणौता में पहली से पांचवीं कक्षा तक करीब 16 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने स्कूल में शिक्षकों की तैनाती करने की मांग की है।
ग्राम पंचायत पटेर की प्रधान अंजना कुमारी ने कहा कि स्कूल में पिछले काफी समय से कोई भी अध्यापक नहीं है। इस कारण बच्चों की पढ़ाई में मुश्किलें आ रही हैं। इस सारी स्थिति से शासन को अवगत करवाया गया है। प्रतिनियुक्ति पर एक टीचर की ड्यूटी लगाई गई है जो दूसरे स्कूल से ही बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दे रहे हैं।
विभाग ने अभी कुछ दिन पहले ही स्कूल में एक एचडी की नियुक्ति की है। वह जल्द ही स्कूल ज्वाइन करेंगे। इसके लिए 15 दिन का वक्त होता है। प्रतिनियुक्ति के तौर पर एक अध्यापक की ड्यूटी लगाई गई है।
सुदर्शन कुमार, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग बिलासपुर