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Bilaspur News: एसडीओ से मारपीट मामले में आरोपियों को फिर राहत, राज्य की अपील खारिज

Thu, 16 Apr 2026 11:23 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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अदालत से
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साक्ष्यों में भारी विरोधाभास, आरोपियों को मिला संदेह का लाभ
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत का फैसला
निचली अदालत द्वारा बरी करने के आदेश को ठहराया सही
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने सरकारी कर्मचारी से मारपीट के बहुचर्चित मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने राज्य की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें तीनों आरोपियों को बरी किया गया था।
मामले के अनुसार, 3 जुलाई 2012 को एक एसडीओ ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी कि शिमला से ड्यूटी कर लौटते समय एक कार में सवार तीन लोगों ने उनका पीछा किया। आरोप था कि घर के पास पहुंचते ही आरोपियों ने गाड़ी रोककर चालक से मारपीट शुरू कर दी। बीचबचाव करने पर एसडीओ के साथ भी मारपीट की गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच पूरी करने के बाद अदालत में चालान पेश किया। मेडिकल जांच में एसडीओ को साधारण चोटें पाई गई थीं। ट्रायल के बाद 22 दिसंबर 2022 को घुमारवीं की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय में अपील दायर की। अपील की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष अपने ही साक्ष्यों पर खरा नहीं उतर पाया। शिकायतकर्ता का अदालत में दिया गया बयान उसके प्रारंभिक बयान से अलग था, जबकि स्वतंत्र गवाहों के बयानों में भी आपसी विरोधाभास सामने आए। सबसे अहम गवाह चालक ने घटना से ही इनकार कर दिया और अभियोजन का साथ नहीं दिया।
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अदालत ने टिप्पणी की कि इस प्रकार के विरोधाभास मामले की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं। अदालत ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता ने यह दावा किया कि वह बिजली आपूर्ति में आई तकनीकी खराबी देखने जा रहा था, लेकिन यह बात उसके शुरुआती बयान में नहीं थी। बचाव पक्ष के गवाह ने भी ऐसी किसी खराबी से इनकार किया। अदालत के अनुसार यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि घटना के समय शिकायतकर्ता वास्तव में सरकारी ड्यूटी पर था या नहीं, जिससे सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप भी साबित नहीं हो पाया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में आरोप साबित करना अभियोजन पक्ष की जिम्मेदारी होती है। यदि साक्ष्यों में संदेह की गुंजाइश हो तो उसका लाभ आरोपियों को दिया जाता है। सभी तथ्यों और साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद अदालत ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत के बरी करने के फैसले को सही ठहराया। साथ ही, संबंधित अदालत का रिकॉर्ड वापस भेजने के निर्देश भी जारी किए गए।
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