स्वारघाट (बिलासपुर)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील बनाकर देने वाली वर्करों के खुद के घर में चूल्हा न जलने की नौबत आ गई है। मिड डे मील वर्करों को एक माह से मानदेय नहीं मिला है। उनके सामने परेशानी यह है कि कोरोना काल के दौरान वे अपने घर की रोजी रोटी कैसे चलाएं।
एटक यूनियन से संबंधित मिड डे मील वर्कर यूनियन की जिलाध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने बताया कि बिलासपुर जिले के 23 सौ से ज्यादा मिड डे मील वर्करों समेत पूरे प्रदेश भर के 24 हजार मिड डे मील वर्करों को जून माह का मानदेय अभी तक नहीं दिया गया है। अब जुलाई का महीना भी खत्म होने को है।
बता दें कि उक्त वर्करों को महज 2300 रुपये महीना मानदेय मिलता है। वह भी समय पर नहीं मिल रहा है। कभी दो महीने बाद तो कभी तीन महीने बाद इन वर्कर्स को मानदेय दिया जाता है। जिलाध्यक्ष ने बताया कि मिड डे मील बनाने में 90 प्रतिशत महिलाएं है। जिनमें अधिकतर महिलाएं गरीबी रेखा से नीचे आती हैं और कई महिलाएं विधवा हैं। जिनका अन्य कोई सहारा नहीं है। महंगाई के दौर में 2300 रुपये में गुजारा कर पाना मुश्किल है।