हिमाचल प्रदेश भूतपूर्व ट्रक ऑपरेटर संघर्ष समिति बरमाणा ने निगम प्रबंधन दो टूक शब्दों में चेतावनी दे दी है। समिति का कहना है कि यदि निगम प्रबंधन ने गत 19 फरवरी को हुई बैठक में लिए गए निर्णयों को लागू नहीं किया, तो समिति अपने हकों के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होगी।
इसकी सारी जिम्मेवारी निगम प्रशासन की होगी। समिति ने इस बारे में वीरवार को संयोजक तिलकराज ठाकुर की अध्यक्षता में हिमाचल प्रदेश भूतपूर्व सैनिक निगम बरमाणा के प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि गत 19 फरवरी को हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक ट्रक प्रचालकों की बैठक में पारित प्रस्तावों को डिमांड हाल बरमाणा में अमलीजामा पहनाया जाए। संयोजक तिलकराज ठाकुर ने बताया कि बैठक में गाड़ी कटवाने के लिए गाड़ी के मालिक और आश्रित को पहचान पत्र जारी करने, बरमाणा में निगम के सभी जिला प्रधानों की हाजिरी लगाने का निर्णय हुआ था।
उन्होंने पुराने ट्रकों को बदलने की नीति को तुरंत वापस लेने की भी मांग की है। इसमें तर्क दिया गया है कि निगम प्रशासन और जिला प्रधानों को यह निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर नियुक्त कर रखे हैं।
मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर गाड़ी का निरीक्षण करने के बाद निर्णय लेता है कि उक्त गाड़ी सड़क पर चलने लायक है या नहीं। ज्ञापन में सभी ट्रक ऑपरेटर्स ने माल भाड़ा की कटौती बारे एसीसी प्रबंधन के साथ हुए अनुबंध को सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
उन्होंने कहा है कि निगम प्रबंधन ने एसीसी कंपनी द्वारा दिए जा रहे किराया कटौती बारे दिए जा रहे पत्रों बारे न तो ट्रक ऑपरेटर्स को सूचित ही किया और न ही इस बारे ट्रक ऑपरेटर्स का साधारण अधिवेशन बुलाना ही जरूरी समझा।
निगम प्रबंधन बैठकों में लिए गए फैसलों को लागू नहीं करता है। भूतपूर्व सैनिक ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर कमेटी ट्रक ऑपरेटर्स के हितों के विरुद्ध कार्य करने के लिए नहीं, बल्कि कल्याण के लिए बनाई गई है। इस अवसर पर महेंद्र सिंह, राकेश चंदेल, राजेंद्र ठाकुर, प्रकाश चंद, रोशन लाल, ओंकार सिंह, तुलसी राम, नंदलाल, नरेंद्र सिंह, विजय चंदेल, श्याम लाल और दिनेश कुमार आदि उपस्थित रहे।