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मिशन दृष्टि : 100 बच्चों की आंखों की जांच, 20 में मिली समस्या

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डीएवी स्कूल चंगर में हुई स्क्रीनिंग, पहली सितंबर से पूरे जिले में शुरू होगा अभियान
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चिह्नित बच्चों का तैयार होगा रिकॉर्ड

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बच्चों में आंखों की समस्याओं की समय रहते पहचान और उपचार के लिए जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे मिशन दृष्टि के तहत शुक्रवार को डीएवी स्कूल चंगर में पायलट जांच के दूसरे चरण का आयोजन किया गया। इस दौरान एलकेजी और यूकेजी के करीब 100 बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की गई। जांच में करीब 20 बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं और रिफ्रैक्टिव एरर के संकेत मिले।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने स्क्रीनिंग प्रक्रिया का जायजा लिया। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा, एनटीपीसी की कंसल्टेंट चिकित्सक ईशा, क्षेत्रीय अस्पताल के चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही।
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उपायुक्त ने कहा कि मिशन दृष्टि का उद्देश्य सरकारी और निजी स्कूलों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे तक पहुंचना है। छोटे बच्चे अकसर अपनी दृष्टि संबंधी समस्या को समझ नहीं पाते और न ही उसे अभिभावकों या शिक्षकों को बता पाते हैं। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से समस्या की शुरुआती स्तर पर पहचान बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कमजोर दृष्टि का असर बच्चे की पढ़ाई, एकाग्रता और कक्षा में भागीदारी पर पड़ सकता है। अभियान के तहत चिह्नित बच्चों के फॉलोअप, विशेषज्ञ परामर्श और उपचार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
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जिला प्रशासन के अनुसार मिशन दृष्टि हिमाचल प्रदेश का अपनी तरह का पहला व्यापक प्रोजेक्ट है। इसके तहत सीएसआर और डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध करवाई गई आधुनिक ऑटो रिफ्रैक्टोमीटर मशीन से बच्चों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग की जा रही है। पायलट चरण में प्राथमिक विद्यालय डियारा और आंगनबाड़ी केंद्र में भी स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उपायुक्त ने बताया कि पायलट चरण के अनुभवों के आधार पर पहली सितंबर से मिशन दृष्टि को पूरे जिले में व्यापक स्तर पर शुरू किया जाएगा। इसके तहत सरकारी और निजी स्कूलों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की जाएगी। चिह्नित बच्चों का रिकॉर्ड तैयार कर नियमित फॉलोअप किया जाएगा और जरूरत के अनुसार चश्मे, विशेषज्ञ परामर्श व उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
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