भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अनुसंधान निदेशालय के संयुक्त तत्वाधान में किसान भवन में मंगलवार को एक दिवसीय मशरूम मेले का आयोजन किया गया।
मेले में किसानों को विशेषज्ञों ने मशरूम खेती करने के टिप्स दिए। इसमें बढ़ी संख्या में मशरूम उत्पादकों और किसानों ने भाग लिया। अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों ने मशरूम की विभिन्न किस्मों, उत्पादन, मार्केटिंग, आय को बढ़ाने सहित अन्य विषयों पर किसानों को जरुरी टिप्स दिए।
इस दौरान मेले में प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में आने वाले किसानों का मार्गदर्शन किया। मेले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सदस्य एवं पूर्व सांसद सुरेश चंदेल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि किसान मशरूम की खेती उगाकर आर्थिक तौर पर सुदृढ़ हो सकते हैं।
मशरूम की खेती करना स्वरोजगार का बेहतर विकल्प है। बिलासपुर जिला में भी मशरूम की खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। किसानों को जागरूक करने तथा वैज्ञानिकों के टिप्स देने के लिए इस प्रकार के मेलों का आयोजन किया जाता रहेगा। इससे किसान अधिक से अधिक मशरूम खेती उगाकर संबल बन सकें।
इस दौरान अनुसंधान केंद्र के निदेशक डा. वीपी शर्मा ने कहा कि किसान अन्य कामों के साथ मशरूम की खेती आसानी से कर सकते हैं। उन्होंने किसानों तथा मशरूम उत्पादकों को अधिक से अधिक इसकी खेती से जुड़ने का आह्वान किया।
ढींगरी मशरूम की खेती फायदेमंद
बिलासपुर जिला में मशरूम की दूसरी प्रजातियों सहित ढिंगरी मशरूम का उत्पादन किसान अधिकांश तौर पर करते हैं। जोकि लाभकारी व्यवसाय माना जाता है।
ढिंगरी के उत्पादन के लिए उत्पादन कक्ष कम लागत पर बनाए जा सकते हैं। इसका फसल चक्र भी 40 से 50 दिन का होता है। एक किलोग्राम ढींगरी का लागत मूल्य लगभग 10 से 15 तक होता है। इसे बाजार में भी आसानी से बेचा जा सकता है।