अंतिम विदाई के दौरान शहीद बेटे अंकेश की फोटो को छाती से लगाकर खड़ी मां और साथ में खड़े पिता। संवाद
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भराड़ी (बिलासपुर)। घुमारवीं के सेऊ गांव के शहीद अंकेश भारद्वाज की शहादत के बाद अभी तक शासन और प्रशासन की ओर से परिवार के सदस्य को नौकरी या आर्थिक सहायता देने का कोई ऐलान नहीं किया गया है। लेकिन शहीद अंकेश के पिता ने कहा कि मैने अपने बेटे को दिनरात मेहनत करवाकर पहलवान बनाया था। उन्होंने कहा कि बेटा एक बेहतरीन खिलाड़ी था।
शहीद के पिता बांचा राम ने कहा कि कि क्षेत्र में खेल अकादमी बनाई जाए, जहां पर खिलाड़ी तैयार हो सकें। अकादमी में युवाओं को सेना में भर्ती होने की ट्रेनिंग दी जाए। शहीद अंकेश के पिता ने कहा कि वह अपने बेटे को सुबह 4 बजे उठा दिया करते थे। रोजाना 20 से 25 किलोमीटर दौड़ लगवाते थे। रात को चार बार उठाकर दूध पिलाते थे। बड़े शौक से अपने बेटे को खिलाड़ी बनाया था।
शहीद के पिता खुद बीएसएफ से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके चार और भाई भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं। शहीद अंकेश के पिता का सपना क्षेत्र के युवाओं को सेना में भर्ती होते देखना है। शहीद के पिता ने कहा कि बेटा देशसेवा में शहीद हुआ है। बेटा देश में महज 22 वर्ष की आयु में नाम रोशन कर गया, इसका नाज है। खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग ने कहा कि सरकार की तरफ से शहीद के परिवार की मदद दी जाएगी। गर्ग ने कहा कि सोमवार को मुख्यमंत्री से मिलेंगे। शहीद सैनिक के परिवार के लिए बात की जाएगी।
मोक्ष धाम पर अपने शहीद बेटे को नमन करती मां।- फोटो : BILASPUR