जहां देश में लिंग अनुपात चिंताजनक तरीके से गिरता जा रहा है। लड़के की चाहत में लोग बेटियों को गर्भ में मौत के घाट उतार रहे हैं। वहीं ऐसे माहौल में हिमाचल जिला बिलासपुर की मलरांव पंचायत ने मिसाल कायम की है।
पंचायत में एक हजार लड़कों के पीछे करीब 1375 लड़कियां है जो कि जिला में सबसे अधिक है। बेटियों का मोल समझने वाली इस पंचायत के लिए बेटियां लक्ष्मी का रूप साबित हुई और इसकी बदौलत वह लखपति भी गई है।
बेहतर लिंग अनुपात के लिए पंचायत को बुधवार को प्रशासन से सम्मानित करते हुए पांच लाख रुपये का इनाम दिया। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए आयोजित कार्यक्रम में एडीएम डा. चांद प्रकाश शर्मा ने 5 लाख रुपये का चेक पंचायत प्रतिनिधियों को सौंपा।
बिलासपुर के किसान भवन में मंगलवार को गर्भाधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग जांच प्रतिषेध) अधिनियम 1994 के तहत पंचायत प्रधानों, बीडीसी सदस्यों, जिला परिषद सदस्यों, नगर परिषद, नगर पंचायत सदस्यों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस मौके पर एडीएम ने कहा कि गर्भ धारण पूर्व लिंग चयन और प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण दंडनीय अपराध है। लिंग चयन न करें, कन्या शिशु को बचाएं उन्होंने कहा कि इस अधिनियम को कड़ाई से लागू करने बारे व्यापक पग उठाए जा रहे हैं तथा कोई भी डाक्टर या अन्य जो लिंग जांच करवाने के लिए प्रेरित करेंगे वह भी सजा के पात्र होंगे।
घटते लिंग अनुपात में यही बात सामने आ रही है कि लिंग जांच करने पर लोग कन्या भ्रूण हत्या कर रहे हैं। इसमें गुण सूत्र को अलग करने और फिर टेस्ट ट्यूब मेल बेबी तैयार करना भी इस अधिनियम के खिलाफ है।
इस पर भी कड़ी सजा का प्रावधान है । इस एक्ट का उल्लंघन करने वालों को पहली बार किए गए अपराध के लिए 3 वर्ष की कैद एवं 10 हजार रुपये का जुर्माना और दोबारा किए अपराध के लिए 5 वर्ष की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
गर्भवती महिला के पति और परिवार के सदस्यों और अन्य व्यक्ति द्वारा लिंग चयन कराने के लिए और इसके लिए उकसाने पर पहली बार किए अपराध के लिए 3 वर्ष की कैद, 50 हजार रुपये जुर्माना।
अपराध को दोहराने वाले को 5 वर्ष की कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना किया जाना निर्धारित है । इस संदर्भ में निदान केंद्र के प्रभारी और मालिक, परीक्षण करने वाले चिकित्सक और व्यक्ति और गर्भवती महिला की लिंग परीक्षण के लिए उकसाने वाला व्यक्ति गर्भवती महिला के पति और रिश्तेदार व किसी भी रूप में लिंग चयन के विषय मे विज्ञापन देने वाले व्यक्ति उत्तरदायी माने जाएंगे।
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी भाग लिया और पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम 1994 और 1996 के बारे में जानकारी दी गई।