घुमारवीं (बिलासपुर)। जिले में पिछले दो दिनों से पड़ रही घनी धुंध ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धुंध के कारण लोगों को आवागमन तथा दूसरे कामों को लेकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घनी धुंध से लोगों के दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। मंगलवार को धुंध इतनी घनी थी कि विजिबिलिटी मात्र 20 मीटर ही रही। इसका सबसे ज्यादा असर यातायात पर देखने को मिला। सुबह 10 बजे भी वाहनों की लाइट जला कर चलना पड़ रहा था। मंगलवार को धुंध का असर इतना ज्यादा हो गया कि सूर्य देव के दर्शन भी दोपहर 12 के बाद ही हुए। बाजारों में दुकानदार आग जलाकर सर्दी से राहत पाने का प्रयास करते दिखाई दिए। धुंध के कारण तापमान में आई भारी गिरावट के बाद क्षेत्र में सर्दी खांसी और बुखार के मरीजों में भी लगातार वृद्धि हुई है। क्षेत्र में सबसे अधिक धुंध उन क्षेत्रों में दिखाई दे रही है जहां पर कोई नदी, नाला या खड्ड है। इस धुंध का लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ रहा है। धुंध के कारण ऑक्सीजन की कमी होना स्वाभाविक है। इस कारण दमा मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। घुमारवीं अस्पताल में ठंड के कारण लगातार जुखाम और बुखार के मरीजों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बात अगर घुमारवीं अस्पताल की करें तो 300 की ओपीडी वाले सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या 500 से ऊपर पहुंच गई है। इसमें अधिकतर मरीज बुखार और सर्दी खांसी वाले ही आ रहे हैं। धुंध से सबसे ज्यादा परेशानी वाहन चालकों, स्कूली बच्चों तथा सरकारी कर्मचारी और गृहणियों को झेलनी पड़ रही है। धुंध ने किसानों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। जनवरी माह शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक बारिश नहीं हुई है। इसका असर गेहूं की फसल पर होना तय है। अगर आने वाले कुछ दिनों में बारिश हो जाती है तो वह फसल के लिए बेहतर साबित होगी।
कोट
धुंध में जितना कम बाहर निकलेंगे उतना ही ठीक रहेगा। धुंध में बाहर निकलने से सर्दी, खांसी और सांस की बीमारियां होने का खतरा रहता है। बच्चों को भी धुंध में बाहर नहीं निकलना चाहिए। जितना हो सके लोगों को एहतियात बरतने की जरूरत है।
- डॉ. आशुतोष शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, घुमारवीं