बिलासपुर के मैहला में सतलुज में हो रही अवैध डंपिंग
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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी ने एक बार फिर सजलुज नदी में मलबा डालना शुरू कर दिया है। हालांकि एनजीटी ने सतलुज नदी में किसी भी प्रकार की डंपिंग पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगा रखा है। हैरानी इस बात की है कि इसके बाद भी कंपनी सरेआम नदी में मलबा डाल रही है।
इससे जहां नदी को नुकसान पहुंच रहा है वहीं वन संपदा भी बड़े पैमाने पर बर्बाद हो रही है। इसके बाद भी न ही जिला प्रशासन और न ही वन विभाग इस मामले को लेकर गंभीर दिखाई दे रहा है।
लोगों की शिकायत के बावजूद भी वन विभाग ने इस संबंध में अभी तक कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं की है। इससे स्थानीय ग्रामीणों में भी रोष है। सजलुज नदी में किसी भी प्रकार से मलबा डालने पर कोर्ट ने पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा रखा है।
वहीं गत वर्ष एनजीटी ने फोरलेन निर्माण में लगी कंपनी को भी साफ आदेश दिए थे कि अगर नदी में किसी भी प्रकार का मलबा फेंका गया तो वह कोर्ट निर्माण कार्य पर भी रोक लगाने से किसी प्रकार का गुरेज नहीं करेगा।
इसके बाद जिला प्रशासन और वन विभाग को भी निर्देश किए गए थे कि इस पूरे मामले पर नजर रखे। मगर कोर्ट के आदेशों के बाद भी सरकारी तंत्र मामले को लेकर बेखबर बना हुआ है।
शनिवार को भी डडनाल (मेहला) में चैनेल नंबर 15400 से 700 तक दिन में काम पर लगी मशीनों ने सतलुज नदी में मलबा डालने का काम किया। इससे जहां मलबा नदी में फेंका गया।
वहीं वन संपदा को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि इस संबंध में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के सदस्यों ने भी वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। मगर उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
समिति के महा सचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि इस पूरे मामले की वीडियो बनाई गई है। इसे अगली सुनवाई के दौरान एनजीटी के समक्ष पेश किया जाएगा। डीएफओ सीबी ताशीलदार ने बताया कि मौके पर विभाग की टीम को भेजा गया है। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।