बिलासपुर। निदेशक और प्रारक्षी मत्स्य सतपाल मेहता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के जलाशयों और सहायक नदियों में 12 हजार से अधिक मछुआरे मछली पकड़ कर रोजी-रोटी कमा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश के 5 जलाशयों में गोविंद सागर, पौंग, चमेरा, कोलडैम और रणजीत सागर का क्षेत्रफल 43785 हेक्टेयर के करीब है।
इन जलाशयों में 5300 से अधिक मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। निदेशक ने बताया कि 16 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर रोक थी। 15 अगस्त को सीजन का कार्यान्वयन किया गया। इस बार विभाग ने 6.31 लाख के करीब 70 एमएम आकार से अधिक का मत्स्य बीज इन जलाशयों में संग्रहित किया है।
दो माह के बंद के बाद बढ़े मत्स्य उत्पादन से विभाग के साथ-साथ मछुआरों का मनोबल भी बढ़ा है। गोविंद सागर जलाशय से 15.53 टन जोकि पिछले साल से 5 टन अधिक, कोलडैम से 217 किलो, पौंग जलाशय में 10.40 टन जो पिछले साल से 3.37 टन अधिक और चमेरा से 37 किलो और रणजीत सागर से 4.6 टन जो पिछले साल से 2.12 टन अधिक मछली पकड़ी गई।
बताया कि विशाल मानव निर्मित जलाशयों की सघन निगरानी करना विभाग के लिए चुनौती से कम नहीं है। परंतु मत्स्य विभाग इस चुनौती के समाधान के लिए प्रतिवर्ष सामान्य जलों में दो माह के लिए मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। इस अवधि में अधिकतर महत्वपूर्ण प्रजातियों की मछलियां प्राकृतिक प्रजनन करती हैं।
निदेशक ने बताया कि जलाशयों में मत्स्य धन संरक्षण के लिए विशेष कर्मचारी बल तैनात कर कैंप लगाए जाते हैं। इससे ये कर्मचारी जल और सड़क दोनों मार्गों से गश्त कर मत्स्य धन की सुरक्षा करते हैं।