खैर कटान मामले में महज लीपापोती
श्री नयना देवी अवैध खैर कटान मामला
वन विभाग की बड़ी लापरवाही आई सामने
किसी भी जांच टीम ने इमानदारी से नहीं की जांच
रितेश गुलेरिया
बिलासपुर।
श्री नयनादेवी अवैध खैर कटान मामले को लेकर वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जांच में सामने आया है कि मामले की जांच को बनाई गई किसी भी टीम ने अपनी ड्यूटी इमानदारी से नहीं निभाई। जो भी टीम मौके पर गई, उसने मामले की जांच करने की जहमत नहीं उठाई। हालत यह रही कि मार्च 2017 में तत्कालीन डीएफओ हेडक्वार्टर मुंशी राम जब अपनी टीम के साथ मौके पर गए तो उन्होंने मात्र सलाओ वन खंड में पहुंच कर 22 खैर के पेड़ कटने की बात कह कर डैमेज रिपोर्ट बना कर जांच की रस्म को अदा कर दिया। हैरत की बात है कि उन्होंने कहा कि कनफारा और खरकड़ी देहात में उन्होंने चेकिंग की, जहां उन्हें 46 खैर के मोछे मिले। इसकी दस पेड़ कटने की डैमेज रिपोर्ट बनाई गई। खरकड़ी देहात में मात्र 12 पेड़ खैर के काटे जाने की बात कही, जबकि विजिलेंस जांच में इसी क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ कटे पाए गए हैं। यह सब वन विभाग की मिलीभगत को जाहिर कर रही है।
इसके अलावा वन विभाग ने तत्कालीन आरओ घुमारवीं सुरेंद्र वीर सिंह, तत्कालीन आरओ कलोल रमेश और तत्कालीन आरओ झंडूता लौहकू राम की अध्यक्षता में भी खैर कटान को लेकर एक कमेटी बनाई गई। लेकिन, इन कमेटियों ने भी जांच में कोताही बरती है। इसके बाद विजिलेंस ने श्री नयना देवी के सलोआ वन खंड में 4700 से अधिक खैर कटान पाया है। इससे 9.33 करोड़ का नुकसान आंका गया है। लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि वन विभाग की टीम को उक्त कटान क्यों नजर नहीं आया? ऐसे में इस संबंध में इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि कटान मिलीभगत से हुआ है। इधर, सूत्रों की मानें तो जांच टीम के अधिकारियों के अलावा विजिलेंस तत्कालीन डीएफओ एचके सरवटा, मुंशी राम और सीवी तहसीलदार के कार्यकाल का रिकॉर्ड भी विजिलेंस टीम अपने साथ ले गई है। इधर, इस संबंध में डीएफओ सरोज भाई पटेल का कहना है कि विजिलेंस ने जो रिकॉर्ड मांगा था, उसे दे दिया गया है। मामले की जांच विजिलेंस कर रही है। इस संबंध में कुछ नहीं कह सकता हूं।