बघाट बैंक में लोन वितरण के मामले में एक और कारनामा सामने आया है। इसमें ग्राहक ने 47 लाख रुपये का लोन लिया, जिसमें बैंक ने 74 लाख रुपये ब्याज जोड़ दिया। दावा किया जा रहा है कि लोन लिए हुए भी अभी मात्र पांच साल ही हुए थे। इसके बाद लोन लेने वाला व्यक्ति डिफाल्टर साबित हो गया। सहायक पंजीयक की अदालत में जब यह मामला पहुंचा तो उन्होंने भी इस पर हैरत जताई। दोबारा से कागजों को खंगाला गया तो इसमें कुछ गड़बडियां होने के आसार नजर आए। इसके बाद संबंधित ग्राहक को अब दोबारा से अदालत में अपील करने के लिए कहा गया है।
आशंका जताई जा रही है कि इसमें राशि को जोड़ने में गलतियां भी हो सकती हैं। मगर इस लोन के बाद ग्राहक को डिफाल्टर की लिस्ट में डाल दिया गया था और उसके खिलाफ समन भी जारी हो गए। तीन दिन चली सहायक पंजीयक की अदालत में डिफाल्टरों की सुनवाई की गईं। इसमें तत्कालीन बैंक बीओडी की ओर से लोन बांटने में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। जहां बैंक प्रबंधकों ने एक ही संपत्ति पर दो-दो लोन दे दिए गए। वहीं गारंटर भी एक ही रखे गए। इसके अलावा कई फर्जी डॉक्यूमेंट पर भी लोन बांटने का भी खुलासा हुआ। अदालत में पहुंचे ज्यादातर गारंटरों ने बैंक प्रबंधकों पर आरोप जड़े कि उन्होंने लोन के समय न तो राशि बताई और न ही यह बताया कि लोन पर उनके दस्तावेज भी लगाए गए हैं। वहीं इस तरह के मामले सामने आने के बाद तत्कालीन बीओडी पर सवाल खड़े कर दिए गए हैं।