मुख्यमंत्री ने जून में की थी घोषणा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जून में बड़ा भंगाल के दौरे के दौरान क्षेत्र को प्राकृतिक पंचायत बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने कृषि विभाग को स्थानीय लोगों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाले बड़ा भंगाल के राजमाह को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने की घोषणा भी की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद कृषि विभाग ने पंचायत को प्राकृतिक पंचायत घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। जुलाई में कांगड़ा प्रशासन ने भी इसकी पुष्टि की थी कि विभाग ने इस संबंध में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राजमाह को मिलेगी नई पहचान
बड़ा भंगाल का राजमाह क्षेत्र के प्रमुख स्थानीय उत्पादों में शामिल है। सरकार की योजना प्राकृतिक खेती से तैयार राजमाह को अलग पहचान देने और इसके विपणन को बढ़ावा देने की है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय राजमाह की ब्रांडिंग पर भी जोर दिया था। प्राकृतिक खेती वाली पंचायत का दर्जा मिलने के बाद इस उत्पाद को रसायन मुक्त खेती से जोड़कर बाजार में अलग पहचान देने की दिशा में काम हो सकेगा।
ईको टूरिज्म विकसित करने की भी योजना
बड़ा भंगाल में प्राकृतिक खेती के साथ ईको टूरिज्म के तौर पर विकसित करने की भी योजना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इसके लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र होने के कारण यहां प्राकृतिक संसाधनों, पारंपरिक जीवनशैली और स्थानीय कृषि उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश में प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में एक लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। सरकार के अनुसार अप्रैल 2026 तक 2,22,893 किसान और बागवान परिवार प्राकृतिक खेती अपना चुके थे और यह पद्धति प्रदेश की 99.3 प्रतिशत पंचायतों तक पहुंच चुकी थी। बड़ा भंगाल को प्राकृतिक खेती वाली पंचायत घोषित करना इसी अभियान का हिस्सा है। अब पंचायत क्षेत्र में रासायनिक इनपुट पर रोक के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभागीय स्तर पर सहायता और प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।