हिमाचल सरकार ने कहा है कि बाबा रामदेव को यदि साधुपुल परिसर के बदले मुआवजा चाहिए तो इसके लिए कोर्ट जाएं और कानूनी लड़ाई में अपना हक साबित करें। मुख्य सचिव सुदृप्त राय ने गुरुवार को बताया कि राज्य सरकार ने उन्हें लीज पर 96 बीघा भूमि देने में रही कमियों के आधार पर ही यह सौदा रद किया है।
उन्होंने बताया कि यह भूमि अब सरकार की है और कब्जा लेने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो रही है। इसलिए बाबा रामदेव यहां किसी प्रकार की गतिविधि नहीं कर सकते। उनसे राज्य सरकार भी 27 फरवरी का प्रस्तावित कार्यक्रम रद करने की अपील करेगी। उनके समर्थक समझदार हैं, इसलिए उम्मीद है कानून व्यवस्था का कोई मसला नहीं उठेगा। इससे पहले बाबा रामदेव ने कहा है कि सरकार उन्हें साधुपुल में निवेश किए गए 10 करोड़ लौटा दे, वह जमीन छोड़ देंगे।
एक अन्य घटनाक्रम के तहत राज्य सरकार ने बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ से एचपीएमसी का वह करार भी रिन्यू नहीं किया है, जिसके तहत बाबा हर साल एप्पल कंस्ट्रेट लेते थे। मुख्य सचिव ने कहा कि साधुपुल की जमीन महाराजा पटियाला ने इंदिरा चिल्ड्रन होम के लिए दी थी। यहां वही बनेगा। यह जमीन कामन विलेज अलाटेबल पूल की नहीं थी। पावर ऑफ अटार्नी भी एक इश्यू था। बाबा रामदेव ने लीज की शर्तों के अनुसार तीन साल में काम भी पूरा नहीं किया। सारे मामले में लीगल एडवाइज के बाद ही कार्रवाई हुई है।
'हिमाचल आने पर कोई मनाही नहीं'
उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव हिमाचल में कहीं भी आना चाहें, उनका स्वागत है, लेकिन साधुपुल में उनका अब कोई हक नहीं है। राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने कहा कि बाबा रामदेव के हिमाचल आने पर कोई मनाही नहीं है, लेकिन वह साधुपुल वाली जमीन पर कोई गतिविधि न करें। जिला प्रशासन को संपत्ति कब्जे में लेने के निर्देश दे दिए हैं। उम्मीद है कि बाबा कानून व्यवस्था बनाए रखने में खुद भी सहयोग देंगे।
डीसी-एसपी को कब्जा लेने के आदेश
मुख्य सचिव ने सोलन की डीसी मीरा मोहंती और एसपी रमेश छाजटा से करीब एक घंटा बैठक की। इसमें जिला प्रशासन को कब्जे की कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है। डीसी राजस्व अफसरों की एक टीम के साथ यह कार्रवाई करेंगी और एसपी कानून-व्यवस्था बिगड़ने की संभावनाओं को देखते हुए रणनीति तैयार करेंगे। बैठक में 27 फरवरी की संभावित परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई।