वैज्ञानिकों ने लाहौल घाटी में पाई जाने वाली कंटीली झाड़ी सी बकथोर्न (छरमा) पर लगने वाले फलों पर शोध कर एक कैप्सूल बाजार में उतारा है। यह कैप्सूल हार्ट की समस्याओं, ब्रेन स्टोक, गैस्टिक और अल्सर से होने वाले घाव को ठीक करने में काफी फायदेमंद है।
मुंबई की अर्जुन बॉयोटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने सी बकथोर्न से मिरेकल-7 नामक एक कैप्सूल बाजार में उतारा है। सहयोगी कंपनी हिम बर्वज एंड फ्रूट प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से घाटी में करोड़ों रुपए की लागत से एक अत्याधुनिक संयंत्र लगाने की दिशा में भी कार्य चल रहा है। अर्जुन बॉयोटेक प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर नीतिश जोशी ने मिरेकल-7 कैप्सूल तैयार करने की पुष्टि की है।
उन्होंने कहा कि गैस्टिक और अल्सर से होने वाले घाव को ठीक करने के साथ यह ब्रेन स्टोक, हार्ट की समस्याओं और शरीर को एनर्जी देने में काफी फायदेमंद है। मुंबई, दिल्ली और बंगलूरू में इसकी खासी मांग है। कंपनी के वैज्ञानिकों की मानें तो यह कैप्सूल यूरोपियन देश के मुकाबले ज्यादा स्ट्रांग भी नहीं है और न ही इसका कोई साइड इफेक्ट है। केंद्र सरकार भी इस प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए मददगार है।
तीन मार्च को होगा सम्मेलन
तीन मार्च को जनजातीय भवन भुंतर में सी बकथोर्न पर सम्मेलन होगा। इसमें वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी मुख्य अतिथि होंगे। इसमें कई वरिष्ठ वैज्ञानिक विशेषज्ञ, सरकारी विभागों के अधिकारी तथा लाहौल-स्पीति के किसान-बागवान हिस्सा लेंगे। लाहौल-स्पीति सीबकथोर्न सोसाइटी के अध्यक्ष विशन दास परशीरा ने बताया कि इस दौरान सीबकथोर्न से तैयार कई उत्पाद देखने को मिलेंगे।