सीमा की सफलता के पीछे लंबी कहानी और संघर्ष
सीमा की सफलता के पीछे लंबी कहानी और संघर्ष है। अभ्यास के दौरान चोट और शारीरिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने मैदान से दूरी नहीं बनाई। एक समय इंजेक्शन लगने के कारण उनके लिए दौड़ना मुश्किल हो गया था, लेकिन जुनून ऐसा था कि महज कुछ दिनों बाद फिर ट्रैक पर उतर गईं। इसके बाद साई हॉस्टल धर्मशाला में प्रशिक्षण के दौरान कोच केहर सिंह पटियाल ने उनके खेल को नई दिशा दी। राष्ट्रीय स्पर्धाओं में लगातार पदक जीतने के बाद सीमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। एशियाड में पदक जीतना उनकी लक्ष्य की राह में एक बड़ा पड़ाव है। सीमा ने अपनी जीत का श्रेय मां केसरी देवी, एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई), भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और कोचों को दिया है। सीमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच, साई और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया को दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण और मार्गदर्शन ने उन्हें हर चुनौती से लड़ने की ताकत दी।