जो स्कूल बंद होंगे, उनमें कार्यरत शिक्षकों और गैर शिक्षकों को सरप्लस पूल में शामिल कर अन्य शैक्षणिक संस्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा। बैठक में फैसला लिया गया कि दस तक छात्र संख्या वाले उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों का दर्जा कम होगा। 20 से 25 विद्यार्थियों वाले हाई और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पांच किलोमीटर के दायरे में समायोजित होंगे। उपनिदेशकों से ऐसे स्कूलों की एक सप्ताह में जानकारी मांगी गई है। शैक्षणिक भ्रमण पर सिंगापुर गए कई शिक्षकों ने बैठक में अपने अनुभव साझा किए। बैठक में अधिकांश शिक्षा उपनिदेशकों ने बताया कि उनके जिलों में कई ऐसे स्कूल हैं, जहां इस बार कोई दाखिला नहीं हुआ। सभी जिलों से दी गई जानकारी के हिसाब से प्रदेश भर में ऐसे स्कूलों की संख्या करीब 80 पाई गई।
बुधवार सुबह 11 बजे शुरू हुई समीक्षा बैठक शाम करीब साढ़े सात बजे तक चली। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बैठक में बताया कि लड़के-लड़कियों के स्कूलों को सह शिक्षा वाले स्कूलों में तबदील करने की शुरुआत उनके विधानसभा क्षेत्र जुब्बल-कोटखाई से होगी। अधिकारियों ने बताया कि 10 से कम संख्या वाले हाई स्कूलों का दर्जा कम कर मिडल किया जाएगा। ऐसे वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों का दर्जा कम कर हाई किया जाएगा। स्कूल बंद करने के फैसलों का विरोध होने पर सरकार ने अब स्कूलों का दर्जा घटाने का फैसला लिया है। जिन स्कूलों का दर्जा घटेगा, वहां पढ़ रहे बच्चों को अन्य स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा।