हिमाचल प्रदेश में धारा-118 के 755 मामले लंबित हैं। आवेदकों ने हिमाचल में औद्योगिक, व्यवसाय और आवासीय और गृह निर्माण के लिए सरकार से मंजूरी मांगी है। औपचारिकताएं पूरी न होने से यह मामले लंबित हैं। कांग्रेस सरकार ने धारा-118 के तहत 1180 मामलों को मंजूरी दी है। इसमें उद्योगपति, व्यवसायी और अन्य लोग शामिल है। प्रदेश सरकार ने सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम पोर्टल के तहत की धारा-118 की मंजूरी देने का फैसला लिया है। ऑनलाइन स्वीकृतियां देने से लोगों को कार्यालय के चक्कर काटने से छुटकारा मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश में धारा - 118 के तहत मंजूरी पाना जटिल प्रक्रिया है। अगर किसी बाहरी राज्य के उद्योगपति ने उद्योग लगाने की इच्छा जताई है तो उन्हें पहले 118 की अनुमति लेनी होगी। वहीं अगर कोई उद्योगपति अपना उद्योग बेचना चाहता है तो जो उद्योगपति उद्योग को खरीदेगा, उसे भी धारा-118 की अनुमति लेना अनिवार्य है, उन्हें भी पहली की तरह धारा-118 की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यहीं नहीं अगर उद्योग का नाम बदलना है या फिर कोई और उद्योग स्थापित करना है तो उन्हें भी दोबारा से 118 की अनुमति लेनी होगी। लोग धारा-118 के लिए डीसी के पास आवेदन करेंगे। औपचारिकताएं पूरी होेने के बाद मामले को सरकार के पास भेजा जाता है। कैबिनेट से ही धारा-118 की मंजूरी दी जाती है।
118 की प्रक्रिया जटिल होने से उद्योग लगाने में रुचि नहीं दिखाते उद्योगपति
हिमाचल प्रदेश में धारा 118 की प्रक्रिया जटिल है। ऐसे में उद्योगपति हिमाचल में उद्योग लगाने के लिए ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। हालांकि प्रदेश सरकार ने उद्योगपतियों को हिमाचल में निवेश करने के लिए एक छत के नीचे सुविधाएं उपलब्ध करने की बात कही है।