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Himachal: ई-चार्जिंग स्टेशन और वर्कशॉप बनाने का रास्ता साफ, वित्त विभाग ने एचआरटीसी को दी कार्य करने की मंजूरी

Sat, 21 Dec 2024 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश में ई-चार्जिंग स्टेशन और ई-वर्कशॉप निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। पहले सरकार ने परिवहन विभाग को ई-चार्जिंग स्टेशन बनाने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन विभाग ने इस कार्य को लेकर असमर्थता जताई थी। अब वित्त विभाग ने दोबारा एचआरटीसी को कार्य के लिए अधिकृत कर दिया है।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में नाबार्ड के सौजन्य से 128 करोड़ से बनने वाले ई-चार्जिंग स्टेशन और ई-वर्कशॉप निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। वित्त विभाग ने एचआरटीसी को इसके लिए निर्माण कार्य करने की मंजूरी दे दी है। अब परिवहन विभाग का बस अड्डा विकास प्राधिकरण प्रदेशभर में बनने वाले ई-चार्जिंग स्टेशन और ई-वर्कशॉप की निर्माण प्रक्रिया शुरू कर पाएगा। पहले सरकार ने परिवहन विभाग को ई-चार्जिंग स्टेशन बनाने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन विभाग ने इस कार्य को लेकर असमर्थता जताई थी। इस वजह से प्रोजेक्ट निर्माण को लेकर मामला काफी समय से उलझ हुआ था। अब वित्त विभाग ने दोबारा एचआरटीसी को कार्य के लिए अधिकृत कर दिया है।

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प्रदेश सरकार ने ई-चार्जिंग स्टेशनों के लिए 128 करोड़ रुपये की सहमति दी है। योजना में 90 फीसदी की राशि नाबार्ड से बतौर ऋण ली जाएगी, जबकि 10 फीसदी राशि का वहन प्रदेश सरकार करेगी। इसको लेकर नाबार्ड ने पहले चरण में 30 फीसदी रकम यानी करीब 35 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है, लेकिन पूरे मामले की वजह से प्रोजेक्ट निर्माण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। गौर हो कि प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ई-वाहनों को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा ई-टैक्सियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

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ढली और तारादेवी में बनेगी ई-वर्कशॉप
प्रोजेक्ट के तहत प्रदेशभर में ई-चार्जिंग स्टेशन का निर्माण किया जाएगा तो वहीं एचआरटीसी ई-वर्कशॉप का निर्माण करने जा रहा है। इसमें इलेक्ट्रिक बसों की मरम्मत की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसमें अधिकांश जिलों को शामिल किया गया है। योजना के तहत जिला शिमला में दो जगह ई-वर्कशॉप का निर्माण किया जाएगा। इसमें ढली और तारादेवी को शामिल किया गया है। यहां आधुनिक सुविधाओं से लैस ई-वर्कशॉप का निर्माण होना प्रस्तावित है। वर्तमान में इलेक्ट्रिक बसों की मरम्मत कार्य को लेकर एचआरटीसी संबंधित कंपनियों पर ही निर्भर है। नई इलेक्ट्रिक बसों को पांच साल की एमसी पर खरीदा जा रहा है, लेकिन यह समय अवधि खत्म होने के बाद निगम को खुद अपने स्तर पर ही बसों के रखरखाव और मरम्मत का कार्य करना होगा। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार सभी जिलों में ई-वर्कशॉप बनाने की योजना पर काम कर रही है।
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