यह आदेश मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एसी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी डिमांड नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भवन योजना की स्वीकृति के बिना नोएडा विकास प्राधिकरण की ओर से याची के विरुद्ध जारी डिमांड नोटिस को रद्द करते हुए वसूली पर रोक लगा दी है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एसी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी डिमांड नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।
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याची का कहना था कि उसे स्पोर्ट्स सिटी तीन में भूमि आवंटित की गई थी, जिसमें से केवल एक पट्टा विलेख ही निष्पादित हो सका है। आवंटित भूखंड के प्रीमियम के रूप में 116,40,10,476 रुपये के स्थान पर 134,37,86,891 रुपये जमा किए हैं।
प्रीमियम राशि से अधिक जमा करने के बावजूद विकास प्राधिकरण ने भवन योजना को मंजूरी दिए बिना अतिरिक्त प्रीमियम की वसूली के लिए डिमांड नोटिस जारी कर दिया। कोर्ट ने पाया कि याची शून्य अवधि के लाभ और भवन योजनाओं की संशोधित मंजूरी का हकदार है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्राधिकरण द्वारा जारी डिमांड नोटिस को रद्द कर दिया।