माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। शिवालिक की पहाड़ियों और दो तरफ जंगल से घिरा प्रदेश का सबसे हरेभरे शहर यमुनानगर में वायु प्रदूषण की स्थिति रविवार को खराब स्थिति में पहुंच गई। शहर का एक्यूआई शाम को चार बजे 279 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया। हालांकि दोपहर दो बजे के बुलेटिन की बात करें तो यह आंकड़ा 282 था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी एक्यूआई बुलेटिन में यमुनानगर देशभर में तीसरे स्थान पर रहा।
देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर हरियाणा का ही बल्लभगढ़ रहा, जहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 304 दर्ज किया गया। वहीं राजस्थान की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी 282 एक्यूआई के साथ दूसरे स्थान पर रही। इससे पूर्व भी यमुनानगर में कई बार प्रदूषण उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। रविवार को जारी की गई वायु गुणवत्ता सूचकांक की सूची में सबसे ज्यादा धूल कणों की मात्रा पाई गई। हालांकि पीएम 10 और कार्बन मोनोऑक्साइड की स्थिति सामान्य बनी हुई है। जबकि बेहद सूक्ष्म पार्टिकुलेट मेटर 2.5 माइक्रोग्राम की मात्रा सामान्य से करीब पांच गुना ज्यादा है। शहर में प्रदूषक तत्व की मात्रा दोपहर 2 से रात 11 बजे के बीच ज्यादा रहती है।
शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह प्लाईवुड और मेटल इंडस्ट्री को माना जाता है। वहीं थर्मल, शुगर मिल समेत दो दर्जन से ज्यादा बड़ी औद्योगिक इकाईयां भी हैं। समय-समय पर राज्य प्रदूषण बोर्ड की तरफ से इनकी जांच की जाती है। वहीं सड़कों पर उड़ने वाली धूल, स्टोन क्रशर की धूल और रेत खनन के कार्य से भी हवा में धूल कण बढ़ते हैं।
इन शहरों में चिंताजनक स्थिति
शहर - सूचकांक
बल्लभगढ़ 304
भिवाड़ी 282
यमुनानगर 279
मानेसर 233
मुरादाबाद 230
गाजियाबाद 222
कटनी 220
ये है एक्यूआई का मानक
0-50 तक अच्छा
51-100 सामान्य
101-200-संतोषजनक
-201-300- खराब
301-400- बेहद खराब, सामान्य लोगों को भी बीमारियों का खतरा।
-401-500- खतरनाक
मौसम का असर प्रदूषण पर पड़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की तरफ से दिल्ली एनसीआर के लिए गाइडलाइन दी गई है। अभी यमुनानगर के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। शहरवासियों से अपील है कि वे प्रदूषण बढ़ाने वाले कार्य करने से बचें। ताकि शहर में लोग स्वच्छ हवा में सांस ले सकें। अगर प्रदूषण और ज्यादा बढ़ता है तो सरकार की तरफ से जारी उपायों पर अमल किया जाएगा। - निर्मल कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड