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स्वास्थ्य के लिए मान रहे फायदेमंद तो बेरोजगार युवा निराश

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मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया। मध्यम वर्ग के लोगों को इस बजट से महंगाई, टैक्स में छूट, स्वास्थ्य और बेरोजगारी को लेकर बड़े ऐलान की उम्मीद थी, लेकिन महंगाई और टैक्स पर छूट को लेकर कोई बड़ा एलान नहीं हुआ।
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कस्बा निवासी रमन धमीजा ने बताया कि कोरोना काल में स्कूली पढ़ाई लिखाई को हुए नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार ने बजट के माध्यम से डिजिटल यूनिवर्सिटी बनाने का एलान किया है। इससे आगामी दिनों में शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम साबित होंगे। 75 जिलों में डिजिटल बैंकिंग यूनिट स्थापित करने की घोषणा होने से बैंकिंग क्षेत्र के नए स्तर पर पहुंच कर लोगों की कार्यप्रणाली को सुगमता से चलाने में मदद करेगी। हालांकि इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं होने से मध्यमवर्गीय व वेतनभोगियों को फिर मायूसी हाथ लगी है। दो साल पुराने आईटीआर में अपग्रेड करने से कुछ राहत जरूर मिलेगी।
कस्बा निवासी डॉ. प्रमोद बसाती का कहना है कि राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम के लिए खुला मंच शुरू होने से आमजन को सीधा लाभ मिलेगा। गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य परामर्श व देखरेख सेवाओं के लिए राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को फायदा होगा। टेली मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों का एक नेटवर्क स्थापित होगा। कोविड के दौरान इमरजेंसी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए किसी विशेष पैकेज की घोषणा को लेकर आमजन को आस थी, लेकिन निराशा हाथ लगी।
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कस्बा निवासी संदीप कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा बजट में बेरोजगारी को दूर करने के लिए 60 लाख लोगों को रोजगार देने की घोषणा की है। परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के लिए अलग से योजना चलाने की कोई घोषणा न होने से ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को निराशा हाथ लगी है। मौजूदा समय में ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर युवा उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे है।
सरपंच अमरीक सिंह का कहना है कि बजट में किसानों को डिजिटल सेवा देने व तिलहनों के उत्पादन को बढ़ावा देने का अभियान शुरू करने की घोषणा की गई है। देशभर में केमिकल फ्री नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा दिए जाने से किसानों को कृषि करने के नए तकनीकों के बारे में जानकारी बढ़ेगी। मौजूदा वित्त वर्ष में 2.37 लाख करोड़ रुपये के खाद्यान्न की एमएसपी के तहत किसानों से खरीद की गई है। बजट में साल 2023 में मोटा अनाज वर्ष घोषित करने का फैसले से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
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