हरियाणा के यमुनानगर से यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने व अन्य कार्यों के लिए गए छात्र रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद वहीं फंस गए हैं। इधर, उनके परिजनों को उनकी सुरक्षा की चिंता सता रही है। वहां फंसे अपने बच्चों को सकुशल वापसी के लिए वीरवार को काफी संख्या में अभिभावक शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर से उनके आवास पर मिलकर गुहार लगाई।
उन्होंने मंत्री से मांग की है कि उनके बच्चों को सुरक्षित घर वापस लाने का प्रबंध किया जाए। जिस पर कंवरपाल गुर्जर ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह अपनी तरफ से हर संभव मदद करेंगे। इस बारे में वह अंबाला सांसद रतन लाल कटारिया से भी बात करेंगे। ताकि वह विदेश मंत्रालय से संपर्क कर वहां रह रहे बच्चों को भारत लाने के लिए ठोस कदम उठा सकें।
बेटे की चिंता सता रही है : संजीव
शहर के विश्वकर्मा मोहल्ला निवासी संजीव सभलोक ने बताया कि उनका बेटा चिराग यूक्रेन में इवानो फ्रैंकिवस्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। इस साल उसका चौथा सेमेस्टर चल रहा है। बेटे की सुरक्षा को लेकर वह बहुत परेशान हैं। जब से रूस ने यूक्रेन पर हमले की बात कही है तब से बेटे की सुरक्षा की चिंता सता रही है। रात से लेकर दोपहर तक कई बार बात हो चुकी है। शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि उनके बच्चों को सुरक्षित लाया जाएगा।
बेटे से लगातार बात कर रहे हैं : अनिल
लाल छप्पर क्षेत्र निवासी अनिल ने बताया कि उनका बेटा अंकुर भी चार साल से इवानो यूनिवर्सिटी में रह कर पढ़ाई कर रहा है। रात भर पूरा परिवार ठीक से सो नहीं सका है क्योंकि टीवी पर लगतार यूक्रेन पर हमले की खबरें आ रही हैं। थोड़ी-थोड़ी देर बाद वह बेटे से फोन पर बात कर रहे हैं। अंकुर ने उन्हें बताया कि इवानों में तो अभी हमला नहीं हुआ है लेकिन डर बहुत लग रहा है।
बेटे को बाहर निकलने से मना किया है : अमीर चंद
अंबाला के गांव जलूबी निवासी अमीर चंद ने बताया कि उसका बेटा प्रशांत इवानो यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा है। वह आज शिक्षा मंत्री से मिलने उनके आवास पर आया था। बेटे से उनकी बात हुई थी। उन्होंने बेटे से कहा है कि वह अपने क्वार्टर के अंदर ही रहे। प्रशांत का कहना है कि रूस की तरफ से इवानो में हमला नहीं हुआ है। वहां फिलहाल सब कुछ सामान्य है परंतु सभी डरे हुए हैं।
सरकार मदद करे : सुमित कांबोज
गांव भूखड़ी निवासी सुमित कांबोज ने बताया कि उसकी भांजी इंदू कांबोज यूक्रेन के इवानों में चार साल से पढ़ाई कर रही है। हमले की बात से भांजी काफी डरी हुई है। परिवार के सभी सदस्य उससे लगातार बात कर रहे हैं। उसे हिम्मत दे रहे हैं कि वह डरे नहीं, हौसला रखे और वहां पर अपने जानकारों के साथ ही रहे। ताकि किसी मुसीबत के समय में वह मिलकर उसका सामना कर सकें। भारत सरकार से उम्मीद है कि सभी बच्चे सकुशल वापस लौट जाएंगे।
बेटे से लगातार बात कर रहे हैं : नैब सिंह
गांव ताहरपुर कलां के नैब सिंह मलिक ने बताया कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि भारत सरकार सभी बच्चों को वापस लेकर आएगी। उसका बेटा रितिक मलिक यूक्रेन के इवानों में फंसा हुआ है। रात से लेकर सुबह तक कई बार बेटे से बात हो चुकी है। बेटा सुरक्षित अपने फ्लैट में है। बेटे से कहा है कि वह ज्यादा बाहर न जाएं। यदि कोई दिक्कत आए तो वह तुरंत आसपास से मदद मांगे।
चिंतित परिजन घर वापसी की कर रहे दुआएं, राशन हुआ महंगा तो एटीएम से रुपये निकालने की लगी होड़
‘कुछ दिन से सुनने में आ रहा था कि रूस यूक्रेन पर जल्द हमला कर सकता है। बुधवार रात तक तो सब कुछ सामान्य था। हम बेफिक्र होकर सोए थे। गुरुवार सुबह करीब छह बजे थे कि सड़कों पर लोगों का शोर सुनकर अचानक हमारी नींद टूट गई। खिड़की से झांकने पर देखा तो बाहर लोग इधर-उधर दौड़ रहे थे। उनके हावभाव से लग रहा था कि वे काफी डरे हुए हैं। जैसे ही हमने टीवी चलाया तो समाचार देखते ही हम भी डर गए। हर चैनल पर यही खबर आ रही थी कि रूस ने यूक्रेन पर हमला करने का एलान कर दिया है। इससे पहले हम कुछ सोच समझ पाते घर से भी फोन आने लगे। कभी मम्मी बात करती तो कभी पापा। वह बस एक ही बात कह रहे थे कि बच्चो किसी तरह सुरक्षित घर वापस आ जाओ।’ यह आपबीती है यमुनानगर के उन युवकों की जो रूस के हमले के बीच यूक्रेन के इवानो शहर में फंसे हैै। इवानों में फंसे युवकों ने फोन पर अपनी व्यथा और यूक्रेन के हालात की जानकारी दी।
बैंकों से रुपये निकालने, खाना एकत्रित करने की लगी होड़
शहर की प्रोफेसर कॉलोनी निवासी अंकुर शर्मा ने फोन पर बताया कि मैं यूक्रेन में इवानो फ्रैंकिवस्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। यूक्रेन की राजधानी कीव में हमला होने के वीडियो लगातार मोबाइल पर आ रहे हैं। इमरजेंसी लागू होते ही हर कोई बैंक से रुपये निकालने के लिए दौड़ रहा था। इसके बाद खाने का सामान खरीद रहे थे। हमने भी बाजार से अगले सात दिनों के लिए खाने का सामान, पानी खरीदा है। दुकानों पर सामान भी महंगा मिल रहा है। अंकुर ने बताया कि हमले के डर से सब बहुत परेशान हैं। घर पर हर 15 से 20 मिनट में बात हो रही है। 27 फरवरी को वापस आने के लिए 50 हजार रुपये में फ्लाइट की टिक बुक कराई है। यहां प्रोफेसर कॉलोनी में रहने वाले पिता अनिल कुमार, माता कांता रानी, बड़ा भाई गुलशन शर्मा व भाभी सभी चिंतित हैं।
एक फ्लैट में इकट्ठा हुए भारतीय छात्र
शहर के विश्वकर्मा मोहल्ला के चिराग सबलोक ने बताया कि मैं भी इवानो से एमबीबीएस कर रहा हूं। यूक्रेन की राजधानी कीव में तो हालात खराब हैं, इवानो में फिलहाल शांति है। परंतु कब तक यह नहीं पता। सुबह से डरे हुए हैं। लोग कई दिनों के लिए तेल, गैस, खाने-पीने का सामान स्टॉक कर रहे हैं क्योंकि यहां पर ज्यादातर लोग अपना खाना खुद ही तैयार करके खाते हैं। इस फ्लैट में पहलेे तीन ही भारतीय थे। परंतु हमले के डर से अब यहां 10 भारतीय छात्र इकट्ठे रह रहे हैं।
हम सभी इकट्ठे इसलिए हुए हैं ताकि मुसीबत में एक दूसरे के काम आ सकें। जो भारतीय छात्र दूसरी जगहों पर रहते हैं उनसे व्हाट्सएप ग्रुप्र बनाकर एक दूसरे का हाल जान रहे हैं। चिराग ने बताया कि उनके साथ ही फ्लैट में बिहार से अश्वनी कुमार दिनकर, पटना का सुभाष कुमार व अभिषेक, उत्तर प्रदेश का पुनीत, आंध्र प्रदेश का श्री विष्णु व यमुनानगर से अंकुर, रितिक, नितिन, प्रशांत रह रहे हैं। घर पर मम्मी ज्योति, छोटा भाई मानव व पिता संजीव सभी चिंतित होकर लगातार बात कर रहे हैं। शाम को साढ़े सात बजे इवानो में भी फायरिंग की आवाज सुनने लगी थी।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष के बच्चे भी फंसे
महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष गांव मारवा खुर्द निवासी ऊषा कमल भी शिक्षा मंत्री से मिलने पहुंची। ऊषा कमल ने बताया कि उसका बेटा सुनीत चार साल से व बेटी सुनीर पांच साल से खारकी व यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने दोनों की भारत के लिए टिकट बुक कराई थी परंतु वापस लौटने से पहले ही फ्लाइट रद्द हो गई। दोनों बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है। शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि वह उनकी हर संभव मदद करेंगे।