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एक लाख रुपये रिश्वत लेने में ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी समेत दो काबू

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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) जगाधरी कार्यालय के प्रवर्तन अधिकारी अनिल कुमार और एक निजी व्यक्ति अशोक गुप्ता को एक लाख रुपये के कथित रिश्वत मामले में काबू किया है। आरोप है कि कर्मचारियों की भविष्य निधि जमा कराने संबंधी शिकायत की जांच निपटाने के एवज में फर्म संचालक से उक्त रकम मांगी गई थी। सीबीआई ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। बुधवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार जगाधरी की एक फर्म संचालक ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि उसने अपनी फर्म के कर्मचारियों के संबंध में भविष्य निधि से संबंधित नवंबर 2018 से जुलाई 2019 की अवधि के सभी बकाया जमा कर दिए थे। इसके बावजूद शिकायत के मामले में ईपीएफओ जगाधरी ने उसकी फर्म के खिलाफ सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत जांच शुरू कर दी। उक्त जांच के दौरान ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी ने उसको एक निजी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए कहा। इसके बाद उसने निजी व्यक्ति से मुलाकात की।
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आरोप है कि उसने कथित तौर पर जांच को निपटाने के एवज में प्रवर्तन अधिकारी की ओर से एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। इस शिकायत पर सीबीआई ने ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया। उन्होंने फर्म संचालक को केमिकल लगाकर एक लाख रुपये दिए। इसके बाद फर्म संचालक निजी व्यक्ति से मिलने गया। जैसे ही फर्म संचालक ने निजी व्यक्ति को रुपये दिए, तभी इशारा मिलते ही सीबीआई ने दबिश दी और निजी व्यक्ति को एक लाख रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ लिया।
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पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह प्रवर्तन अधिकारी के नाम से एक लाख रुपये की रिश्वत ले रहा था। इसके बाद प्रवर्तन अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया। सीबीआई के अधिकारियों ने प्रवर्तन अधिकारी के कार्यालय की भी तलाशी ली।
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