संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। विगत माह आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर जो निर्णय लिए गए थे। उन पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। जिस वजह से न तो जिले में सड़क हादसों पर अंकुश लग रहा है और न ही सड़कों पर सफर पूरी तरह सुरक्षित है। सड़कें भी बदहाल हैं और उनकी जर्जर हालत हादसों को न्योता भी दे रही हैं।
शहर का सूरते हाल ऐसा है कि सड़क से गुजरते हुए जान आफत में रहती है। कहीं बरम टूटा पड़ा है, तो कहीं बरम ही गायब है। नई बनाई सड़क की बजरी उखड़कर बिखर गई है। कहीं बरम और सड़क में डेढ़ फीट तक का अंतर है। अभी तक सड़कों पर कोहरे व अंधेरे में होने वाले दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बंदोबस्त नहीं किए गए हैं।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हर महीने होती है। पिछले महीने हुई बैठक में भी हादसों में अंकुश लगाने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए थे। परंतु इन पर काम नहीं किया गया। अब इस माह की बैठक 23 दिसंबर को होनी है। हर बैठक में अधिकारी समस्याओं पर चर्चा तो करते हैं, लेकिन समाधान पर बात नहीं करते हैं। यही कारण है कि इतनी बैठकों के बाद एक भी दुर्घटना संभावित क्षेत्र में हादसों में कमी नहीं आई है।
22 हादसों में 12 की गई जान, 10 हुए घायल
इस माह जिले के विभिन्न हिस्सों में कुल 22 हादसे हो चुके हैं। जिनमें 12 लोगों की जान जा चुकी है। जबकि 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। सबसे ज्यादा लोगों की जान बिलासपुर थाना क्षेत्र में गई है। यहां पर कुल पांच हादसों में पांच लोगों की मौत हुई है। वहीं थाना छछरौली में एक हादसा हुआ, जिसमें एक ही मौत हो गई। इसी तरह थाना छप्पर में हुए दो हादसों में एक जख्मी हो गया, जबकि एक की जान चली गई। थाना फर्कपुर क्षेत्र के एक हादसे में एक घायल हो गया। इसके अलावा थान जठलाना में एक हादसा हुआ और एक ने जान गवां दी।
इसी तरह रादौर में हुए चार हादसों में एक ही जान चली गई और तीन जख्मी हो गए। थाना साढौरा में दो हादसे हुए, जिसमें एक की मौत हो गई और एक घायल हो गया। थाना सदर जगाधरी में चार हादसों में एक की जान चली गई और तीन घायल हो गए। वहीं थाना शहर यमुनानगर में दो हादसे हो चुके हैं। एक हादसे में एक ही जान चली गई और दूसरे में एक घायल हो गया।
कोहरे से बचने के नहीं किए बंदोबस्त
नवंबर में हुई बैठक में नवंबर में बढ़ते कोहरे की आशंका के मद्देनजर डीसी की ओर से सर्दी से पहले आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे कि सभी चौक चौराहों पर रिफ्लेक्टेड बोर्ड, पट्टी इत्यादि लगवाई जाए। इसके अलावा सड़कों पर पीली सफेद पट्टी लगाने, सड़क के टूटे किनारे दुरुस्त करने, बरम ठीक करने के निर्देश भी दिए गए थे। मगर इनमें से अभी तक कोई काम पूरा नहीं हुआ है। हालत ऐसे हैं कि शहर के सबसे व्यस्त महाराणा प्रताप चौक स्थित यातायात पुलिस बूथ के पास ही बरम गायब है। यहां पर अक्सर वाहन एक तरफ झुक जाते हैं। इसी तरह चौक पर बना डिवाइडर अंधेरे में दिखाई नहीं देता है। इसके अलावा विश्वकर्मा चौक से महाराणा प्रताप चौक पर आते समय रेलवे ओवर ब्रिज पड़ता है। ब्रिज की रेलिंग पर चमकीली पट्टी नहीं लगाई गई है। वहीं यहां पर सड़क व बरम में दो फीट तक का अंतर है। ऐसे में हादसों की संभावनाएं बनती ही रहेंगी।
बैठक में अधिकारियों को सुरक्षा दृष्टि से निर्देश दिए गए थे। इस बार बैठक में पिछले कामों की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए कमेटी बनाई गई है। अधिकारियों की लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। - पार्थ गुप्ता, डीसी यमुनानगर।
सड़क सुरक्षा की बैठक के मुद्दों पर काम किया जा रहा है। जहां पर कमी है इसके लिए अधिकारियों को भेजकर निरीक्षण करवाया जाएगा। जहां पर कमियां उन्हें तुरंत दूर करवाया जाएगा। - राजकुमार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, यमुनानगर।