यमुनानगर। जगाधरी-बिलासपुर स्टेट हाईवे की सड़क निर्माण के दो माह में ही टूट गई। सड़क के इतनी जल्दी टूटने से लोग इसकी क्वालिटी पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि स्टेट हाईवे को बनाने के लिए सारे नियम दरकिनार कर दिए गए। सड़क का निर्माण उस समय किया गया जब सरकार सड़कों को बनाना तो दूर उनकी मरम्मत तक की इजाजत नहीं देती।
नवंबर के आखिरी सप्ताह में सड़क बनाने का काम शुरू हुआ और जनवरी के आखिर तक काम पूरा भी कर दिया गया। जब सड़क का निर्माण हो रहा था तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने मौके पर जाकर झांका तक नहीं। जिसका नतीजा सबके सामने है। सड़क दो माह में ही टूट कर बिखरने लगी। सर्दी में ठंड ज्यादा होने से तापमान काफी कम हो जाता है। कम तापमान में जो सड़क बनाई जाती है उसमें निर्माण सामग्री की पकड़ मजबूत नहीं हो पाती। इससे सड़क के जल्दी टूटने का खतरा रहता है। नवंबर से जनवरी तक अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है। इसलिए सरकार द्वारा 15 नवंबर से सड़कों को बनाने और मरम्मत पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। ताकि करोड़ों रुपये का नुकसान न हो।
रात को भी बनाई गई थी सड़क
ठेकेदार ने जगाधरी से बिलासपुर तक सड़क का निर्माण कम तापमान में किया। पीरूवाला, रामखेड़ी के अलावा और भी कई जगहों से सड़क उखड़ने लगी है। इतना ही नहीं कई बार तो सड़क का निर्माण रात को किया गया। वह भी तब जब रात का तापमान दिन से भी कम होता था। इसके अलावा बारिश के दौरान भी सड़क बनाने का काम बंद नहीं किया गया। बिलासपुर निवासी राकेश गागट ने सड़क टूटने की शिकायत सीएम को भेजी है।
छह साल में पूरी हुई सड़क
रक्षक विहार नाका से लेकर बिलासपुर के पुराना पेट्रोल पंप तक स्टेट हाईवे की लंबाई करीब 13 किलोमीटर है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इसे चौड़ा करने की घोषणा सितंबर 2016 में की थी। पीडब्ल्यूडी ने करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से सड़क की चौड़ाई सात से 10 मीटर किया है। सड़क को पूरा करने में ही अधिकारियों ने छह साल का लंबा समय लगा दिया। पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सर्दी में सड़क बनाने के लिए क्षेत्र के नेताओं ने उन पर दबाव डाला था। यदि ऐसा है तो इसके लिए नेता नहीं अधिकारी जिम्मेदार है। नेताओं के कहने पर उन्होंने सरकार के 10 करोड़ रुपये दांव पर लगा दिए।