यमुनानगर। एकल परिवारों के चलन में कई संयुक्त परिवार मिसाल बने हुए हैं। ऐसा ही विजय कॉलोनी का जैन परिवार है, जहां छह भाइयों का 28 सदस्यीय परिवार साथ रहता है। ये लोग हर तरह की दिक्कत में एक-दूसरे की ढाल बने हुए हैं। कोरोना महामारी से लेकर अन्य आर्थिक व सामाजिक परेशानियों में परिवार की एकजुटता काम आई, वहीं हर चुनाव में पूरे परिवार का एक साथ मतदान करना भी सभी का ध्यान खींचता है।
अन्य सरकारी-निजी कार्यक्रमों में भी परिवार एक तस्वीर में दिखता है। परिवार की नींव 85 वर्षीय धर्मपाल जैन व उनकी 78 वर्षीय पत्नी जयमाला हैं। जिन्होंने सभी बेटों को न सिर्फ लायक बनाया बल्कि साथ मिलकर रहने की भी परवरिश दी। बेटों की शादी के बाद यही सीख बहुओं को दी।
वर्ष 2000 में हादसे में खोया बड़ा बेटा, तब से दिक्कतों में सब साथ
धर्मपाल के छह बेटों में सबसे बड़े प्रमोद की वर्ष 2000 में हादसे में मौत हो गई थी। तब से प्रमोद की 48 वर्षीय पत्नी राजरानी व इकलौते बेटे 28 वर्षीय निशांत के साथ प्रमोद के माता-पिता और पांचों भाइयों के परिवार हर दिक्कत में साथ हैं। निशांत बीटैक कर गुरुग्राम में नौकरी कर रहा है और उसकी 23 वर्षीय सपना से शादी हो चुकी है। प्रमोद से छोटे भाई 50 वर्षीय सुबोध का कूलर-अलमारी का बिजनेस है, जिनकी 45 वर्षीय पत्नी नीलम व तीन बच्चों में 24 वर्षीय रोबिन, 22 वर्षीय प्रिया, 20 वर्षीय जतिन है। सुबोध से छोटे 48 वर्षीय सुनील जैन का कॉलोनी में किराना स्टोर है। सुनील की 43 वर्षीय पत्नी विनीता व तीन बेटियां 18 वर्षीय मुस्कान, 16 वर्षीय विधि जैन, 14 वर्षीय अर्पिता है।
सुनील से छोटे 45 वर्षीय राजीव दुकानदार हैं, जिनकी 42 वर्षीय पत्नी डोली व तीन बच्चों में 18 वर्षीय प्रिंयका, 16 वर्षीय प्राची व 11 वर्षीय श्रयांश हैं। राजीव से छोटे 42 वर्षीय विकास जैन दुकानदार हैं, जिनकी 41 वर्षीय पत्नी बबीता व दो बेटे 18 वर्षीय वंश व 15 वर्षीय यश है। सबसे छोटे भाई 40 वर्षीय नवीन कलकत्ता में जॉब करते हैं, जिनकी 36 वर्षीय पत्नी मनीषा व दो बच्चों में 12 वर्षीय पारस व 10 वर्षीय मानवी है। परिवार के बच्चे खेल के साथ खेलों में भी पहचान बना रहे हैं, जिनमें मुस्कान कराटे ब्लैक बेल्ट है व दो बार नेशनल अवार्ड पा चुकी हैं। विधि, प्राची व अर्पिता डिस्ट्रिक अंडर-16 बास्केटबॉल टीम की खिलाड़ी हैं।
परिवार के लिए समर्पण मूलरूप से यूपी में कैराना के गांव बुचाखेड़ी के धर्मपाल वर्ष-1980 में काम की तलाश में यमुनानगर आए। काम नहीं मिला तो पत्नी जयमाला व बच्चों के लिए कपड़े की फेरी लगाई। कई साल वीनानगर में किराये पर रहे फिर जयमाला के जेवर बेच विजय कॉलोनी में प्लॉट खरीदा। जहां एक कमरा बनाकर परिवार सहित रहे। मोदी मिल में आठ-दस साल काम कर घर के साथ छह बेटों की शादियां कर परिवार बढ़ाया। तब से अब तक यहीं पर छह बेटों के परिवार बसे हैं। एमए इंग्लिश की पढ़ाई पूरी कर सुनील ने जॉब न कर भाइयों के साथ किराना स्टोर संभाला, वहीं सुबोध ने परिवार की आर्थिक तंगी देख गांव-गांव जाकर आईसक्रीम बेची। इसी तरह परिवार पर कोरोना महामारी व अन्य तरह की आर्थिक व सामाजिक दिक्कतों में सभी सदस्य एक दूसरे की ढाल बने रहे।