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सब्जी की बढ़ती कीमतों से मची हायतौबा, रसोई का बजट बढ़ा

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गृहिणी कमलजीत कौर। - फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। सब्जी की बढ़ती कीमतों से हायतौबा मच गई। सब्जियों के दाम आसमान को छू रहे हैं। इससे ग्राहक को सोचना पड़ता है कि सब्जी लें या नहीं। सब्जियों के दाम बढ़ने रसोई का बजट बढ़ गया। कई सब्जियां तो 100 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत को भी पार गई।
ऐसे में सब्जी की खरीद कम हो रही है।
टमाटर के तड़का सब्जी के स्वाद को दोगुना कर देता है, किंतु यह भी पहले से लाल हो गया। इसकी कीमत 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। वहीं मशरूम 150 रुपये, लहसुन 100 रुपये, मटर 100 रुपये, शिमला मिर्च 100 रुपये बिक रहे हैं। मटर ऐसी सब्जी है जो सर्दी के मौसम में सबसे ज्यादा स्वादिष्ट लगती है लेकिन इसके दामों ने इस सब्जी के स्वाद को मुंह से छिन लिया है। प्याज पहले महंगा हो गया था, लेकिन इसके दाम तेजी से नीचे आने पर अब यह 40 रुपये प्रति किलोग्राम पर टिक गया है।
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सब्जियों के दामों उछाल आना शादी सीजन को भी माना जा रहा है। नवंबर और दिसंबर में शादियों के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं। शादी में मटर, पालक, टमाटर, खीरा, मूली, भिडी, आलू, प्याज, गोभी लहसुन, मशरूम, मिर्च, गाजर, शिमला मिर्च समेत कई सब्जियों की डिमांड काफी बढ़ जाती है। शादियों के लिए लोग एक दिन पहले या फिर सुबह ही मंडी से सब्जी खरीद लेते हैं।
इससे दुकानदारों और रेहड़ी लगाने वालों को पर्याप्त सब्जी नहीं मिलती। यदि मिलती है तो आढ़ती सप्लाई कम होने की बात कह कर महंगी बेचते हैं। दुकानदार इसमें अपना मालभाड़ा व मुनाफा जोड़ कर महंगी बेचते हैं। विक्रेता मदन कुमार ने बताया कि इस बार सब्जी की कीमत बहुत ज्यादा है। टमाटर का रेट भी बहुत बढ़ा हुआ है। पहले लोग एक किलोग्राम टमाटर एक साथ ले जाते थे। ताकि सब्जी के अलावा सलाद में काम आ सके। अब 500 ग्राम या फिर एक पाव ही ले जाते हैं।
गृहिणी कमलजीत कौर का कहना है सब्जियों के दामों पर सरकार को कंट्रोल करना चाहिए। सब्जियोें के दाम इस कदर बढ़े हैं कि खरीदने से पहले सोचना पड़ता है। पहले दो से तीन दिन के लिए एक साथ सब्जी खरीद लेती थी, दाम बढ़ने से एक समय की सब्जी खरीद पाना भी मुश्किल हो रहा है।
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वहीं गृहिणी मीनू बताती हैं कि हरी सब्जियां खाने से स्वास्थ्य ठीक रहता है, किंतु इनके दाम ही इतने है स्वास्थ्य क्या सही रहेगा। सरकार को चाहिए इनके दाम कम करे। दो दिन से सब्जी नहीं खरीदी है। मार्केट में जाकर इनके रेट सुनते हैं तो खरीदने का भी मन नहीं करता है। फिर भी खरीदना मजबूरी है।

गृहिणी मीनू।- फोटो : Yamuna Nagar

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