प्रतापनगर राइस मिल में औचक निरीक्षण करने पहुंचे एसडीएम रोहित कुमार। संवाद
यमुनानगर। राइस मिलों में गबन का मामला सामने आने के बाद अब चावल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। शुक्रवार को छछरौली के एसडीएम रोहित कुमार ने जिला खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नियंत्रक विभाग की टीम के साथ प्रतापनगर की राजधानी एग्रो फूड, राजदरबार एग्रो फूड तथा शाकुंभरी राइस मिल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान राइस मिलों में उपलब्ध धान एवं चावल की फिजिकल वेरिफिकेशन की गई। इस दौरान राइस मिलों में धान कुटाई के बाद स्टॉक किए गए चावल के सैंपल भी लिए गए। इन सैंपल की एमआईएम जांच करवाई गई। रिपोर्ट प्राप्त होने पर यह पाया गया कि कुछ चावल के सैंपल रिजेक्ट घोषित किए गए हैं। रिजेक्ट पाए गए सैंपल के आधार पर इन मिलों में उपलब्ध चावल की कमी की गणना की गई। विभाग द्वारा नियमानुसार मिल संचालकों से खाद्यान्न की रिकवरी हेतु कार्रवाई आरंभ कर दी गई।
एसडीएम रोहित कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन खाद्यान्न वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे निरीक्षण आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगा। विभाग के निरीक्षकों द्वारा जगाधरी, छछरौली, प्रतापनगर, रादौर, सरस्वतीनगर व अन्य सभी स्थानों पर 50 राइस मिलों को मिलिंग हेतु आरओ जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य किसी भी राइस मिल को खाद्य एवं पूर्ति विभाग द्वारा कोई आरओ जारी नहीं किया गया है। इस दौरान डीएफएससी जतिन मित्तल भी मौजूद रहे।
मिलों में बकाया धान पर अब एक दिसंबर को हाेगी सुनवाई:
वहीं प्रतापनगर, छछरौली व रणजीतपुर की मंडी में गबन के बाद बचे धान के हक को लेकर शुक्रवार को न्यायालय में सुनवाई होनी थी। सुनवाई के लिए अदालत ने अब एक दिसंबर की तारीख तय की गई है। न्यायालय में केवल प्रतापनगर की राइस मिलों पर ही रिकॉर्ड थाना प्रतापनगर पुलिस की तरफ से सौंपा गया था। रणजीतपुर चौकी इंचार्ज अपना रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत नहीं कर पाए। हैफेड की तरफ से दलील दी गई कि रणजीतपुर की राइस मिल में रखा 29680 क्विंटल और प्रतापनगर की राइस मिलों में रखा 38960 क्विंटल धान उनका है। इसलिए उन्हें ही यह धान सौंपा जाए ताकि इसे दूसरे मिलों में ट्रांसफर करके कुटाई करवाई जा सके।