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यूक्रेन से लौटे रजत बोले - विदेशों में बढ़ी भारतीय झंडे की ताकत

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ऑपरेशन गंगा के तहत यूक्रेन के खारकीव की सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटी से अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा गांव रादौरी का रजत शर्मा अपने घर पहुंचा। बेटे के सुरक्षित घर पहुंचने पर जहां परिवार में खुशी का माहौल है, वहीं उन्होंने सरकार का भी आभार जताया।
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रजत शर्मा ने बताया कि वह वर्ष 2016 में यूक्रेन में एमबीबीएस की शिक्षा के लिए गया था। उसने कभी सोचा भी नहीं था की जिंदगी में ऐसा भयावह मंजर भी देखना पड़ेगा। वह यूक्रेन के शहर खारकीव की सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटी वीएन कराजीन में पढ़ता है। जून में ही उसकी शिक्षा पूरी होने के बाद उसे डिग्री मिल जाती। परंतु युद्ध के कारण सब खत्म हो गया। छात्रों ने मेट्रो स्टेशन के बंकरों में रहकर रात गुजारी और पेयजल के अभाव में उन्हें केमिकल युक्त पानी को उबाल कर पीना पड़ा। इस दौरान उसकी भारतीय दूतावास में बात होती रहती थी। जब हालात ज्यादा खराब हुए तो वह करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुंचे। इसके बाद कई घंटों के बाद पोलैंड के लवीव शहर में पहुंचे। जिसके बाद भारत सरकार की मदद से अपने देश सुरक्षित लौट सके हैं। रजत ने बताया कि यूक्रेन में भारतीय झंडे की बदौलत उन्हें किसी ने नहीं रोका। वहीं बेटे के सुरक्षित घर वापस लौटने से परिवार में खुशी है। अभी भी परिवार के लोग बेटे पर आई विपदा को याद करके सहम जाते है। रजत के पिता रविंद्र शर्मा ने बताया कि बेटा जब यूक्रेन में था तो घर पर सभी यह सोच कर डरे हुए थे कि उनका बच्चा सुरक्षित भी है या नहीं। परंतु भारत सरकार के प्रयासों से सभी बच्चे सुरक्षित अपने घरों को लौट रहे हैं।
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