यमुनानगर। नवरात्र में मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्वरूपों की पूजा करने का विधान है। शनिवार को तीसरा और चौथा नवरात्र एक ही तिथि को हुआ। मां चंद्रघंटा व कुष्मांडा की एक साथ पूजा अर्चना की गई। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार तृतीया और चतुर्थी तिथि एक ही दिन पड़ी। तृतीया और चतुर्थी एक ही दिन होने के कारण इस बार नवरात्र का समापन भी आठ दिन में हो जाएगा।
रविवार को पांचवें नवरात्र पर मां स्कंदमाता का पूजन होगा। धार्मिक मान्यता है कि स्कंदमाता की आराधना करने से भक्तों की समस्त प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पंडित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि संतान प्राप्ति के लिए स्कंदमाता की आराधना करना लाभकारी माना गया है। माता को लाल रंग प्रिय है, इसलिए इनकी आराधना में लाल रंग के पुष्प जरूर अर्पित करना चाहिए।
मां स्कंदमाता की गोद में भगवान स्कन्द बाल रूप में विराजित हैं। स्कंद मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजाएं हैं। मां का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इन्हें विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार एक तारकासुर नामक राक्षस था। जिसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र से ही संभव थी। तब मां पार्वती ने अपने पुत्र भगवान स्कन्द (कार्तिकेय का दूसरा नाम) को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने हेतु स्कन्द माता का रूप लिया और उन्होंने भगवान स्कन्द को युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया था। स्कंदमाता से युद्ध प्रशिक्षण लेने के बाद भगवान स्कन्द ने तारकासुर का वध किया।