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एग्रीकल्चर: रेलवे से रिटायर कृष्ण लाल तैयार कर रहे ड्रैगन फ्रूट की पौध, घर की छत पर ही बनाई नर्सरी

Thu, 12 May 2022 10:33 PM IST
भूपेंद्र सिंह राजेश कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा)

सार

कृष्ण लाल पांच साल पहले सहारनपुर से 80 पौधे खरीद कर लाए थे, अब खुद पौधे तैयार कर रहे हैं। ड्रैगन का एक पौधा 25 से 30 साल फल देता है।
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रेलवे से रिटायर कृष्ण लाल ने घर की छत पर तैयार की ड्रैगन फल की पौध। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मेहनत व लगन से किए गए काम में हमेशा सफलता ही मिलती है। हरियाणा के यमुनानगर के फर्कपुर में मंडेबर रोड पर रहने वाले कृष्ण लाल ने यह साबित कर दिखाया। कृष्ण लाल अपने 150 वर्ग गज के घर की छत पर ड्रैगन फल के पौधे तैयार कर रहे हैं। अब तक करीब दो हजार पौधे वह तैयार कर चुके हैं।

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खास बात यह है कि एक समय था जब वह नर्सरी से अपने लिए पौधे खरीद कर लाए थे। अब खुद नर्सरी संचालक कृष्ण लाल से लोग ड्रैगन के पौधे खरीद कर ले जाते हैं। ड्रैगन के पौधे लेने के लिए अब आसपास के गांवों के किसान भी उनसे संपर्क कर रहे हैं। जिन्हें खेतों में लगाकर किसान हर साल लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं।

सहारनपुर से खरीद कर लाए थे 80 पौधे
करीब पांच साल पहले ही ड्रैगन फल मार्केट में आया था। इस फल की खूबियों के बारे में जब कृष्ण लाल ने सुना तो वह इसके पौधों की तलाश में जुट गए। काफी मेहनत के बाद सहारनपुर से 80 पौधे मिले। तब एक पौधा 80 रुपये में मिला था। इन 80 पौधों से उन्होंने पहले साल घर की छत पर एक हजार पौधे तैयार किए थे। उसके बाद हर साल दो हजार पौधे तैयार कर रहे हैं। एक पौधा तैयार करने पर करीब 60 रुपये खर्च आता है। इनके द्वारा तैयार किए गए पौधे अब सहारनपुर के अलावा कुरुक्षेत्र व जिले के किसान खरीद कर ले जा रहे हैं।
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एक पौधा 25 से 30 साल देता है फल
कृष्ण लाल ने बताया कि ड्रैगन फल का एक पौधा 25 से 30 साल तक फल देता है। दूसरे साल पौधे पर फल लगने शुरू हो जाते हैं। उन्होंने पिछले साल पौधे से 528 ग्राम का एक फल प्राप्त किया था। एक फल बाजार में 100 से 150 रुपये का मिलता है। ड्रैगन पौधे को पानी न के बराबर चाहिए। मई में पौधे पर फूल आ जाता है जो अक्टूबर तक फल देते हैं। पौधों के साथ-साथ वह सीमेंट के पोल भी तैयार कर रहे हैं ताकि किसानों को इस पौधे को लगाने के लिए भटकना न पड़े। कृष्ण लाल का कहना है कि बागवानी विभाग के अनुसार जिले में केवल वही ड्रैगन के पौधे तैयार कर रहे हैं।

रेलवे से सेवानिवृत्त हैं कृष्ण लाल
कृष्ण लाल 2015 में रेलवे से मैकेनिकल पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें बचपन से ही बागवानी व पौधों से प्यार है। जब वह उत्तर रेलवे की जगाधरी वर्कशाप में थे तो उन्होंने अपने हाथों से पौधे लगाकर वर्कशाप को हराभरा कर दिया था। जब भी रेलवे का कोई बड़ा अधिकारी वर्कशाप में आता था तो उन्हें ही पौधे लगाने व सजावट की जिम्मेदारी दी जाती थी। सेवानिवृत्त होने के बाद वह घर की छत पर ही सब्जी, फल तैयार करने लगे। उनके घर की छत पर इतने पौधे हैं कि पांव रखने तक की जगह नहीं है। उन्हें बस इस बात का मलाल है कि उनके पास जमीन नहीं है ताकि वह बड़े स्तर पर काम कर सकें। उनका कहना है कि यदि बागवानी विभाग उन्हें जमीन उपलब्ध कराने में मदद करे तो वह कुछ बड़ा सकते हैं।

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