संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/बिलासपुर। तीर्थराज कपालमोचन मेले में अब श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा है। कपालमोचन, ऋणमोचन व सूरजकुंड इन तीनों सरोवरों श्रद्धालु मोक्ष की डुबकी लगा रहे। पिछले दो दिन की अपेक्षा बुधवार को सरोवरों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ दिखी। पैर रखने के लिए जगह तक नहीं मिली।
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती देखकर पुलिस ने सुरक्षा और कड़ी कर दी है। बताया जा रहा है वीरवार को तीन लाख श्रद्धालु सरोवरों में डुबकी लगा सकते हैं। श्रद्धालु ट्रकों में ज्यादा आ रहे हैं। ज्यादातर पंजाब के श्रद्धालुु हैं, जो कार्तिक पूर्णिमा के बाद लौट जाएंगे। कपालमोचन के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। मेले में देर शाम तक श्रद्धालुओं का आना जारी रहा।
कोविड के द्वारा देरी से शुरू हुए मेले में इस बार तीसरे दिन पिछले मेले की अपेक्षा 50 प्रतिशत श्रद्धालु कम पहुंचे हैं। मेले में अधिकतर दुकानें किराए पर न चढ़ने के कारण खाली रही। मेले में भीड़ कम होता देख दुकानदारों को अपने सामान की चिंता सताने लगी है। मेले में तीसरे दिन देर रात तक पहुंच रहे श्रद्धालुओं को देखते हुए लगता है की मेले में कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है।
डुबकी लगाने के बाद माता मंत्रा देवी मंदिर जाते हैं श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। तीर्थ राज कपालमोचन के तीनों पवित्र सरोवर में मोक्ष की कामना की डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु माता मंत्रा देवी मंदिर में पूजा अर्चना करने जा रहे हैं। आदिबद्री में शिवालिक की पर्वत श्रृंखलाओं में सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित श्री माता मंत्रा देवी का देश का एकमात्र मंदिर है।
बिलासपुर, रणजीतपुर होते हुए काठगढ़ गांव तक 35 किमी की दूरी सड़क मार्ग से तय करने के बाद श्रद्धालु पैदल तीन किमी ऊपर पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित मंदिर तक पहुंचते है। मेला प्रशासन ने कपालमोचन से आदि ब्रदी के लिए 40 बसें चलाई हैं। श्रद्धालुओं ने आदि बद्री केदारनाथ मंदिर व सरस्वती उद्गम स्थल पर पहुंच कर पूजा अर्चना की।
मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज ने बताया कि मंत्रों से प्रकट हुई श्री माता मंत्रा देवी का यह मंदिर भारत वर्ष में राज्य की सबसे ऊंची दो हजार फुट पहाड़ी चोटी पर सुशोभित है। जहां से मंदिर की सीढ़ी खत्म होती है, वहां से हिमाचल प्रदेश की सीमा शुरू हो जाती है। आदि बद्री में प्रदेश सरकार के द्वारा कायापल्ट को लेकर सरस्वती हैरिटेज बेार्ड के तहत अनेक प्रोजेक्ट शुरू किए गए है।
मां मंत्र देवी में एक सुंदर गुफा में नर-नारायण की अति दिव्य लौकिक एवं मनमोहक दो मूर्तियां एक ही लाल पत्थर में अंकित होकर पिंडी रूप में विराजमान हैं। गुफा के अंदर जाने से रोकने के लिए चार फुट ऊंचे द्वारपाल के रूप में श्री हनुमान जी एवं भैरव जी ऐसे खड़े हैं, जैसे बैकुंठ में जाने से रोकने के लिए जय-विजय खड़े रहते हैं। लोगों का मानना है कि यहां वर्ष में एक बार समस्त देवी-देवता अपने हाथों से हलवा प्रसाद आदि मिष्ठान बनाकर भगवती के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। साल में दो बार आने वाले नवरात्र पर विशेष प्रबंध किए जाते है।
कपालमोचन सरोवर में स्नान करते बच्चे और श्रद्धालु। संवाद- फोटो : Yamuna Nagar