संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। संत महात्माओं के शाही स्नान के साथ ही कपालमोचन मेले की शुरूआत होगी। वहीं मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट की छूट रहेगी। लेकिन कोरोना से बचावका एक टीका अवश्य लगा होना चाहिए।
मेले की शुरूआत के लिए संतों की ओर से कस्बा के खेड़ा मंदिर से शोभायात्रा निकाली जाएगी। खेड़ा मंदिर व्यास सरोवर कल्याण समिति के सदस्य और कस्बावासियों के सहयोग से साधु संतों का स्वागत किया जाएगा। इसके साधु संतों की ओर से कपालमोचन सरोवर, ऋणमोचन सरोवर व सूरजकुंड में स्नान कर मेले की विधिवत रूप से शुरूआत की जाएगी।
इससे पूर्व श्री खेड़ा मंदिर समिति की ओर से 14 नवंबर को खेड़ा मंदिर प्रांगण में रामायण का पाठ शुरू किया जाएगा। वहीं मेला प्रशासन ने पशु मेला आयोजित नहीं करने का निर्णय लिया गया है। उधर, पुलिस विभाग की मदद से आधा दर्जन जगहों पर बैरियर लगाया जाएगा। नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला प्रशासन की ओर से लगभग पांच सौ शौचालय बनाए जा रहे हैं। इस बार शौचालय बनाने के लिए नियमों को ताक पर रख कर काम किया जा रहा है। हर बार शौचालय में पक्के गड्ढे बनाए जाते थे। इस बार कच्चे गड्ढे खोद कर उस पर फट्टे लगा खानापूर्ति की जा रही है।
मेले में पहुंचने लगे श्रद्धालु, दुुकानें भी लगने लगीं
बिलासपुर। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर कपालमोचन में लगने वाले राज्यस्तरीय मेले में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है। भीड़ से बचने के लिए प्रतिदिन 40 से 50 वाहनों में श्रद्धालु मेले में पहुंच कर तीनों सरोवरों में स्नान कर सरोवरों के किनारे दीपदान कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। पंजाब के लुधियाना से आईं अर्चना कौर, डाली, गीता, वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वह पिछले लगभग बीस वर्ष से अपने परिवार के साथ मेले में पहुंचते है। मेले के दौरान भीड़ अधिक हो जाती है। इससे जाम की समस्या पैदा हो जाती है। वाहनों को मेला क्षेत्र से बाहर खड़ा करना पड़ता है. जिससे परिवार के बुजुर्गों को सरोवरों तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस पर हम पहले ही आकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।