परमाणु हमले से बचने के क्या हैं तरीके
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यूक्रेन में फंसे भारतीय मूल के छात्रों को डर के साये में जीना पड़ रह है। वीरवार की रात छात्रों ने डर के साये में बिताई। बारी-बारी से पहरा देकर पूरी रात काटी ताकि किसी भी खतरे का आभास होने पर वहां से सुरक्षित स्थान पर निकला जा सके। इसी बीच अगली सुबह शुक्रवार को छात्रों को राहत भरी खबर मिली कि 26 फरवरी को उन्हें वहां से निकाला जाएगा। इससे छात्रों को कुछ हद तक राहत मिली है। वहीं अभिभावकों ने भी फोन कर अपने बच्चों का हालचाल जाना।
शहर के विश्वकर्मा मोहल्ला निवासी चिराग व लाल छप्पर के अंकुर ने बताया कि वह यूक्रेन के शहर इवानो फ्रैंकिवस्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। जब से हमला हुआ है तब से अपने फ्लैट में रह रहे हैं। आज सुबह यूनिवर्सिटी के डीन की तरफ से उनके पास मैसेज आया था कि 26 फरवरी को उन्हें बस में बैठाकर हंगरी व रोमानिया के लिए रवाना किया जाएगा।
वहां से उन्हें भारत जाने के लिए फ्लाइट मिल जाएगी। शुक्रवार को दूसरी जगहों से कुछ छात्र पोलैंड व रोमानिया के लिए रवाना किए गए। दूतावास से मैसेज आने के बाद यूनिवर्सिटी की तरफ से उनके लिए बस बुक की गई है। बॉर्डर तक जाने के लिए बस का खर्च करीब 1400 रुपये छात्रों को ही देना होगा।
दो-दो छात्रों की ड्यूटी पहरे में लगाई
चिराग व अंकुर ने बताया कि उन्होंने सारी रात दहशत में गुजारी। जो छात्र उनके क्वार्टर में हैं उनमें से दो-दो छात्रों ने शिफ्टों में रातभर जाग कर पहरा दिया ताकि किसी तरह की अनहोनी होने पर समय रहते वहां से निकल सकें। यूक्रेन सरकार की तरफ से मॉर्शल लॉ लगाया गया है, जिसके तहत रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक किसी को भी बाहर जाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने यूक्रेन की राजधानी कीव में अपने दोस्तों से बात की थी। जिन्होंने बताया कि आज फायरिंग तो हुई लेकिन वीरवार के मुकाबले काफी कम। उन्होंने टीवी पर देखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के प्रधानमंत्री से छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने को लेकर बात की थी। इससे उन्हें काफी हिम्मत मिली है।