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दो साल बाद बिना पाबंदी के मनाई जाएगी होली, लोगों में उत्साह, बाजारों में उमड़ी भीड़

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यमुनानगर। रंगों का पर्व होली शुक्रवार को दो साल बाद बिना पाबंदी के मनाई जाएगी। जिसका असर होली की पूर्व संध्या को बाजार में देखने को मिला। लोग उत्साह से सराबोर नजर आए। इस दौरान लोगों ने रंग और खाने के सामानों की जमकर खरीदारी की। इस कारण बाजार में भारी भीड़ रही। भीड़ के चलते शहर की सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रही। जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन त्योहार की उमंग के चलते लोगों ने एतराज नहीं किया।
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उल्लेखनीय है कि पिछले दो साल से हर त्योहार कोरोना संक्रमण के चलते पाबंदियों के भेंट चढ़ जाते थे, लेकिन कोरोना का असर कम होने के कारण इस बार होली पर्व लोग बगैर पाबंदियों के मनाएंगे। पर्व पर लोगों ने विभिन्न प्रकार के रंग, अबीर, गुलाल, पिचकारी सहित चिप्स, पापड़, मिठाइयां आदि खाद्य पदार्थों की जमकर खरीदारी की। ग्राहकों की भीड़ के कारण दुकानदारों के चेहरे पर भी खुशी नजर आई। शहर के रेलवे बाजार, खेड़ा बाजार, पुराना रादौर, न्यू मार्केट, छोटी लाइन, पेपर मिल बाजार, पालिका बाजार, मीराबाई बाजार, संतपुरा रोड, मॉडल टाउन, नेहरू पार्क, प्यारा चौक, रामपुरा, गोबिंदपुरी रोड, आईटीआई, जगाधरी वर्कशॉप, कैंप बाजार, सेक्टर-17 कॉम्पलेक्स, जगाधरी खेड़ा बाजार, सिविल लाइन, छोटी लाइन, दुर्गा मंदिर बाजार, पंसारी बाजार में खूब भीड़ रही। जगह जगह रंग, पिचकारी, मुखौटा, होली विशेष परिधानों के स्टाल सजे रहे। तेज धूप के बावजूद बाजारों में लोग खरीदारी के लिए पहुंचे। इस कारण शाम को बाजारों में काफी भीड़ रही। कई बाजारों से दोपहिया चालकों को गुजरने में भी काफी इंतजार करना पड़ा। होली पर्व पर विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं, जिसके चलते करियाना की दुकानों पर काफी भीड़ रही।
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होलिका पूजन कर टेका माथा
वीरवार सुबह से ही होली की तैयारियों में लोग जुटे रहे। वहीं महिलाएं होलिका पूजन की व्यवस्था में लगी रही। इस दौरान महिलाओं ने बच्चों के लिए बेर, छुआरे, किशमिश, बताशे धागे में पिरोकर कंडी तैयार की। दहन स्थल पर पहुंच कर महिलाओं ने होलिका वेदी पर सूत्र बांधा और जल अर्पित किया। इसके बाद धूप, दीप दान कर परिवार व लोक मंगल की कामना की। वहीं तैयार कंडी पूजन के बाद बच्चों को पहनाई। जबकि होलिका दहन का समय देर शाम नौ बजे रहा। जिस कारण व्रती महिलाओं को काफी इंतजार करना पड़ा। दहन के बाद महिलाओं ने व्रत पूर्ण कर प्रसाद ग्रहण किया।
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रासायनिक रंग छीन सकता है आंखों की रोशनी, करें इससे परहेज
यमुनानगर। होली रंगों का त्योहार है। यह रंगों और खुशियों के उत्सव में नव संचार का प्रतीक है। इस दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाकर खुशी मनाते हैं। परंतु इस दौरान बाजार में कई तरह के रंग बिकते हैं। कई रासायनिक रंगों का प्रयोग अत्यंत घातक हो सकता है। जिसके प्रयोग से चर्म रोग, दमा, खांसी जैसे घातक रोगों के साथ आंखों के लिए हानिकारक है। इतना ही नहीं ऐसे रंगों का प्रयोग करने से आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसलिए होली प्राकृतिक रंगों से ही खेलनी चाहिए। बाजार में होली पर कई प्रकार के रासायनिक रंग जैसे सिंथेटिक और ऑर्गेनिक उपलब्ध हैं। ये एसिड, माइका, ग्लास पॉउडर, अल्कालिस, लीड, बेंजीन तथा एरोमेटिक कंपाउंड के मिश्रण बनाए जाते हैं। इसके अलावा शरीर के साथ प्रतिरोध क्षमता को भी प्रभावित करते हैं। रासायनिक रंग त्वचा और स्वास्थ्य दोनों के लिए बहुत ही नुकसानदायक है।
ऐसे करें अपना बचाव
रंग खेलते समय कुछ बातों का ध्यान रखते हुए अपना बचाव किया जा सकता है। रंग लगाते समय आंखों पर इसका प्रयोग न करें। रंग लगवाते समय अपनी आंखें बंद कर लें। कोशिश करें कि गालों तक ही रंग लगाएं व लगवाएं। वहीं रंग गाढ़ा करने के लिए मिट्टी का तेल, नेलपेंट, ग्रीस, इंजन ऑयल इत्यादि का प्रयोग भूल कर भी न करें। कई बार रासायनिक रंगों में मिले उक्त पदार्थों के कारण त्वचा में जलन होने लगती है।
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हानिकारक हैं रासायनिक रंग: डॉ सौरभ
शशिराज अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सौरभ ने बताया कि होली रंगों का त्योहार है। लेकिन इस दौरान रसायनयुक्त रंगों का प्रयोग स्वास्थ्य व त्वचा के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में इस प्रकार के रंगों के बजाए प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करना चाहिए। इससे त्वचा संबंधी परेशानी सहित खांसी, दमा, बाल झड़ना, आंखों में जलन सहित कई तरह की दिक्कत आ सकती है।
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