संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सात राइस मिलों में गबन का मामला सामने आने के बाद हैफेड और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को बचे हुए अपने धान के खराब होने की चिंता सताने लगी है। इसलिए दोनों ही विभागों ने अदालत से मांग की है कि राइस मिलों में जो धान बचा हुआ है उसे उठवाने की इजाजत दी जाए ताकि उसे आसपास की राइस मिलों में शिफ्ट किया जा सके।
इन राइस मिलों में धान की कुटाई होने पर ही बचा हुआ चावल एफसीआई को सप्लाई किया जा सकेगा। इसे लेकर न्यायालय में 28 नवंबर को सुनवाई होगी। पहले इस पर 26 नवंबर को सुनवाई होनी थी, लेकिन अदालत इसे दो दिन के लिए आगे बढ़ा दिया था।
प्रतापनगर, रणजीतपुर व छछरौली की सात राइस मिलों में जो धान का गबन उजागर हुआ था उसमें से प्रतापनगर की मोरवी नंदन एग्रो फूड्स, अंजनी नंदन एग्रो फूड्स और श्री बालाजी एग्रो फूड्स राइस मिलों में हैफेड द्वारा खरीदा गया धान सप्लाई किया गया था। इसी तरह प्रतापनगर की मैसेज बद्री विशाल एग्रो फूड्स, श्रीजी एग्रो फूड्स, छछरौली स्थित सिंगला एग्रो फूड्स व रणजीतपुर स्थित श्रीश्री बाला जी एग्रो इंडस्ट्री में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का धान है। करीब 14 हजार मीट्रिक टन धान अभी सभी राइस मिलों में खुले में पड़ा है। इस समय सर्दी का मौसम होने से वातावरण में नमी बहुत ज्यादा है।