सिटी सेंटर के सामने विश्वकर्मा मोहल्ले के रिहायशी क्षेत्र में बने कबाड़ के गोदाम में बुधवार मध्यरात्रि करीब डेढ़ बजे भीषण आग लग गई। इस हादसे में पिता और तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। जबकि पत्नी घायल हो गई। उसका नागरिक अस्पताल में इलाज चल रहा है। मरने वालों की पहचान नियामुद्दीन उर्फ राजू (36), फिजा (12), चांद (8), रिहान उर्फ छोटू (3) के तौर पर हुई है। उधर, गोदाम के ऊपर बने विभिन्न र्क्वाटरों में रह रहे 18 लोगों को बमुश्किल बचाया गया।
मृतक नियामुद्दीन यमुनानगर की एक प्लाईवुड फैक्टरी में काम करता था और कबाड़ के गोदाम की पहली मंजिल पर बने क्वार्टर में 30 वर्षीय पत्नी नसीमा और तीनों बच्चों के साथ रहता था। इसी मंजिल पर ही अन्य लोग भी अपने परिवारों के साथ रहते थे।
उधर, आग की सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग की पहले दो गाड़ियां मौके पर पहुंची, लेकिन आग पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका। जिसके बाद 20 गाड़ियों की मदद से नौ घंटों के पश्चात आग पर काबू पाया गया। सिटी थाना पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर उनका पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सौंप दिए हैं।
पुलिस ने मृतक नियामुद्दीन उर्फ राजू के भाई कैमुदीन की शिकायत पर कबाड़ गोदाम के मालिक नवीन के खिलाफ केस दर्ज कर तफ्तीश आरंभ कर दी है। उधर, हादसे के मौके पर डीसी पार्थ गुप्ता और एसपी कमलदीप गोयल मौके पर पहुंचे और गोदाम मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए।
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मोहल्ले में मची अफरा-तफरी
ज्यादा रात होने के चलते सभी लोग सोए हुए थे। अचानक आग लगने के बारे में पता चलते ही रिहायशी एरिया में अफरा तफरी मच गई। चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग भी बाहर आ गए। हर कोई आग को बुझाने के लिए उस तरफ दौड़ा। हालांकि लोगों ने अपने-अपने घरों से आग पर काबू पाने का प्रयास किया, किंतु आग की लपटें इतनी तेज थी कि कोई असर नहीं हुुआ। इसी दौरान दमकल विभाग को इसकी सूचना दी गई। उसके बाद गाड़ियां मौके पर पहुंची। प्राथमिक जांच में दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी हो। कबाड़ी की दुकान में भारी मात्रा में सामान भरा हुआ था। जिसमें अधिकतर पुराने टायर और प्लास्टिक का सामान था। इसी वजह से आग ने भीषण रूप ले लिया। आग की लपटों से दीवार भी सरक गई और चार लोगों के साथ एक गाय भी आग की चपेट में आ गए।
मूलरूप से बिहार के पूर्वी चंपारण विहार के गांव माडीपुर मिलिक निवासी कैमुदीन ने सिटी थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका भाई नियामुद्दीन यमुनानगर में प्लाईवुड फैक्टरी में काम करता था और कबाड़ गोदाम की पहली मंजिल पर बने क्वार्टरों में रहता था। जबकि वह दूसरी गली में अपने परिवार के साथ रहता है और रजाई बनाने का काम करता है। रात डेढ़ बजे उसे आग लगने की सूचना मिली थी। इसके बाद वह अपनी बहन निशा के साथ मौके पर पहुंचे तो देखा गोदाम से घना धुआं निकल रहा था और आग की लपटें सुलग रही थी। उन्होंने अपने भाई के परिवार को बचाने की कोशिश की गई किंतु आग ज्यादा होने के चलते वे अंदर घुस नहीं पाए। इसके बाद मौके पर पहुंचे दमकल विभाग और पुलिस कर्मियों ने क्वार्टरों के पीछे बने दूसरे घरों की छत पर जाकर क्वार्टरों की पीछे की दीवार तोड़ी और उनमें से 18 लोगों को सकुशल बाहर निकाला। लेकिन उसके भाई का परिवार अंदर ही फंस गया और आग से झुलस गया।
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वर्जन
मामले की सूचना मिलते ही मौके का दौरा किया गया है। हादसे में तीन बच्चे और उनके पिता की मौत हो गई है। कबाड़ के गोदाम मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामले में आगे कार्रवाई की जा रही है।
- पार्थ गुप्ता, डीसी, यमुनानगर।