संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। बिजली बोर्ड कार्यालय पर भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में सलेमपुर बांगर के किसानों ने दूसरी बार बिजली बोर्ड और एसडीओ के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया। किसान इससे पहले भी किसान पर दर्ज केस को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय के आश्वासन पर किसानों ने धरना समाप्त किया। एसडीओ बिजली बोर्ड का कहना है कि हमने केस वापस लेने का किसी को आश्वासन नहीं दिया।
उल्लेखनीय है कि जगमग योजना के तहत सलेमपुर बांगर गांव में बिजली बोर्ड के कर्मचारी मीटर घरों से बाहर करने के लिए गए थे। किसानों ने उस समय कर्मचारियों से कहा था कि जब तक किसान आंदोलन चल रहा है और सरकार किसानों की मांग पूरी नहीं करती तब तक गांव में बिजली मीटर घरों के बाहर करने का कार्य नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों के मीटर बाहर करने के विरोध को लेकर एसडीओ बिजली बोर्ड छछरौली कमल पांडरा ने किसान के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने का केस दर्ज कराया था।
इस पर किसान नेताओं व सलेमपुर बांगर के किसानों ने अगले दिन ही बिजली बोर्ड कार्यालय छछरौली पर ताला जड़करएसडीओ के खिलाफ नारेबाजी की थी। उस समय एसडीओ ने किसानों को आश्वासन दिया था कि किसान के ऊपर दर्ज केस वापस लिया जाएगा। इस आश्वासन पर किसानों ने धरना-प्रदर्शन समाप्त किया था। सोमवार को किसानों ने दोबारा बिजली बोर्ड कार्यालय पर नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने बताया कि दो महीने से ज्यादा समय बीतने के बावजूद भी केस वापस नहीं लिया गया। इस पर किसान यूनियन नेताओं व किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि सलेमपुर बांगर निवासी किसान कर्मवीर व सुखदेव ने सरकार की स्कीम का विरोध किया था। इतनी सी बात पर एसडीओ ने किसानों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि किसानों के ऊपर दर्ज केस जब तक एसडीओ वापस नहीं लेता किसानों का धरना प्रदर्शन इसी तरह चलता रहेगा। इस मौके पर वीरेंद्र राणा मुस्ताबाद ब्लॉक प्रधान, बिलासपुर ब्लॉक प्रधान सुखदेव सिंह, बिलासपुर उप प्रधान जसवीर सिंह, छछरौली ब्लॉक प्रधान राज कुमार सीपियोवाला, कर्मवीर सलेमपुर, सुभाष हरतोल आदि मौजूद रहे।
वहीं एसडीओ बिजली बोर्ड छछरौली कमल पांडरा का कहना है कि सलेमपुर बांगर निवासी कर्मवर और सुखदेव ने जगमग स्कीम के तहत कार्य कर रहे कर्मचारियों के सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई थी। इस पर दोनों व्यक्तियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने का केस दर्ज कराया गया था। इस यह मामला पुलिस जांच का विषय है। किसानों को केस वापस लेने का हमारी तरफ से कोई आश्वासन नहीं दिया गया है।