यमुनानगर। आधुनिक युग में भारतीय कुश्ती की विश्व पटल पर अलग पहचान हैं। कॉमनवेल्थ हो या ओलंपिक गेम्स भारत ने कुश्ती में विश्व भर में अपनी पहचान बनाई है। इन गेम्स में भारत को सबसे ज्यादा पदक भी कुश्ती से प्राप्त हुए हैं, लेकिन अब कॉमनवेल्थ गेम्स से कुश्ती को बाहर कर दिया गया है। कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर करने से पहलवानों को भारी निराशा है।
सबसे ज्यादा निराशा हरियाणा के खिलाड़ियों को हुई है। प्रदेश के पहलवानों ने कुश्ती में पदक जीतकर भारत का नाम विश्व भर में चमकाया है। जिले के तेजली खेल परिसर सहित जिले के करीब छह कुश्ती अखाड़ों में विभिन्न श्रेणियों, वजन व आयु वर्ग में करीब 500 बच्चे, किशोर व युवा कुश्ती का प्रशिक्षण ले रहे हैं। हर कोई कुश्ती में देश के लिए पदक जीतने का सपना संजोए जी तोड़ मेहनत कर रहा है।