संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासुपर। आंब वाला मार्ग स्थित जाहरवीर गोगा माड़ी पर छड़ी उत्सव धूमधाम से मनाया गया। मेले में श्रद्धा व आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। रंग-बिरंगी छड़ियां उठाए श्रद्धालु डमरू व सारंगी बजा रहे थे। रिमझिम बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। वहीं मेले में महिलाओं व बच्चों ने दुकानों से जमकर खरीददारी की।
जोगी समाज के लोग पंद्रह-पंद्रह फीट ऊंची छड़ियां लेकर डमरू व सारंगी की धुन पर गाते हुए कस्बे की गलियों, बाजारों व चौराहों से गुजरे। इस दौरान छड़ियों के दर्शन करने के लिए उमड़ पड़े। भक्त छड़ियां लेकर पहले क्षेत्रपाल भैरव मंदिर और इसके बाद जाहरवीर गोगा माड़ी पहुंचे। मंदिर से कुछ दूरी पर छड़ियां स्थापित की गई। पूजा स्थल के निकट बाजार सजा हुआ था। सेवक पवन कुमार, प्रदीप कुमार, अर्जुन काला राम, भूरा, बंटी ने बताया की गोगा माडी पर भंडारा करवाया गया।
रात में जोगी समाज के गायक व भक्तों ने गोगा जाहरवीर के जीवन की साहसिक गाथाओं के बारे में संगीत के माध्यम तरीके से बताया। माड़ी में भक्तों ने धूप, दीप अर्पित कर प्रार्थना की। सेवक प्रदीप कुमार ने बताया कि यह दिन को गोगा जाहरवीर के समाधि दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1100 साल पूर्व जन्मे जाहरवीर ने अपनी माता बाधक माई के आदेश पर घर त्यागकर बागड़ में समाधि ली थी। दरअसल राजा बासंग ने जाहरवीर से प्रार्थना की थी कि नाग वंश समाप्त न करें, बल्कि आज से वह सर्प जाति के बादशाह के रूप में विराजमान हों।