एनजीटी के आदेशों के बावजूद शहर भर का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट किए सीधे पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा जा रहा है। एनजीटी के आदेशों के अनुसार मार्च 2021 तक ऐसे सभी नाले बंद करने के आदेश दिए गए थे। आदेश के बाद नाले तो बंद किए नहीं गए, बल्कि धड़ल्ले से गंदा पानी सीधे नहर में छोड़ा जाने लगा। यही नहीं विभाग के पास उपकरणों व संसाधनों की नहीं, बल्कि अधिकारियों की इच्छा शक्ति व काम न करने की नीति के कारण ऐसा हो रहा है। चूंकि पहले ये पानी रात के अंधेरे में चोरी छिपे छोड़ा जाता था, लेकिन अब ये गंदा पानी एनजीटी के आदेश की परवाह किए सीधे छोड़ा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार शहर की दो बड़ी कॉलोनी शांति कॉलोनी व आजाद नगर के दो नाले डायवर्ट कर जिंदल पार्क के पास स्थित पंपिंग स्टेशन से जोड़े गए हैं। जहां से नालों का पानी ट्रीटमेंट होने के लिए बाड़ीमाजरा स्थित एसटीपी छोड़ने की योजना है। योजना पर कायदे से किया जाए तो इसे लेकर पश्चिमी यमुना नहर को दूषित होने से बचाया जा सकता है। इस पंपिंग स्टेशन से गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट किए सीधे नहर में छोड़ा जा रहा है। यह एनजीटी के नियमानुसार अपराध की श्रेणी में है। जिसमें जुर्माना व सजा तक का प्रावधान है। ऐसे मामलों में जनस्वास्थ्य, सिंचाई विभाग, नगर निगम व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई कर सकते हैं। जबकि यहां ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। अधिकारी इतने लापरवाह है कि बात करने पर वे मामला संज्ञान में न होने की बात कहते हैं। जिस कारण जीवनदायी यमुना नहर प्रतिदिन विषैली होती जा रही है। संवाद
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77 लाख में शुरू हुई योजना
-शांति कॉलोनी व आजादनगर के दो नाले जिंदल पार्क के पास स्थित पंपिंग स्टेशन से जोड़ने की योजना पर 77 लाख से खर्च किए गए हैं। यह जून 2019 में इसे शुरू किया जाना था। इसके लिए पश्चिमी यमुना नहर की पटरी पर बिछाने के लिए 1200 एमएम के पाइप मंगाए गए थे। इस दौरान सिंचाई विभाग से नगर निगम व सिंचाई विभाग के एनओसी विवाद में काम एक साल से ज्यादा समय तक लटका रहा। अक्टूबर 2020 में सिंचाई विभाग से एनओसी मिल गई। त्योहार के दिनों में काम शुरू नहीं किया जा सका। वहीं अब काम होने पर नालों का पानी पंपिंग स्टेशन से गंदा पानी सीधे नहर में छोड़ा जा रहा है।
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कार्रवाई की करेंगे
यमुना बचाने के लिए कई संस्थाएं काम कर रही है। इसी तरह शहर की यमुना बचाओ समिति भी इस दिशा में काम कर रही है। संस्था के अध्यक्ष संजय मित्तल ने कहा कि यमुना को मैला करने में औद्योगिक संस्थानों के साथ अधिकारियों का भी हाथ है। काम सही से न करने के कारण ऐसा हो रहा है। यमुना भारतीय सभ्यता व लोगों की आस्था का प्रतीक है। गंदा पानी छोड़ने से यमुना मैली हो रही है, जिससे लोगों की आस्था को ठेस पहुंच रही है। इसे लेकर वे अभियान चलाएंगे। संबंधित विभागों के सभी अधिकारियों से मिलेंगे। इस मामले में संबंधित विभागों को अपने स्तर पर जांच करने की मांग की जाएगी।
वर्जन
यमुना प्रांत व देश की धरोहर है। नदियों व नहरों के संरक्षण के लिए सरकार कटिबद्ध है। इसके लिए वे स्वयं जांच करेंगे। नगर निगम अधिकारियों की टीम से मुआयना करवाया जाएगा। ऐसा करने की जांच कर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मदन चौहान, मेयर, यमुनानगर।
वर्जन
किसी नदी नहर में इस तरह पानी नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्हें इस बारे कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है, तो इसकी जांच करवाएंगे। इसे बंद करवाया जाएगा और लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
विनोद कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।