यमुनानगर। कृषि में प्रयोग होने वाले यूरिया का प्लाईवुड फैक्टरियों में अवैध इस्तेमाल की जांच करने पहुंची केंद्रीय टीम का सहयोग नहीं करने पर तीन फैक्टरी संचालकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले में कृषि एवं कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी की ओर सेे प्लाईवुड फैक्टरी संचालकों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई है। यही नहीं हाईवे पर जाम लगाने के मामले में भी आरोपी प्लाईवुड फैक्टरी संचालकों और मजदूरों के खिलाफ केस दर्ज किया जा सकता है। वहीं केंद्रीय टीम की बीते रोज हुई छापामारी के बाद शनिवार को भी अधिकांश प्लाईवुड फैक्टरियों के गेट पर ताले लटके रहे।
कृषि एवं कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी ने बताया कि शुक्रवार को हरियाणा सहित उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, केरल, गुजरात में भी कृषि योग्य यूरिया के औद्योगिक प्रयोग को लेकर केंद्र व राज्य की टीमों ने छापामारी की थी। इस कार्रवाई में कृषि मंत्रालय से फर्टिलाइजर के निदेशक हरविंद्र सिंह, कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह सैनी के नेतृत्व में छह टीमें बनी थीं, जिनमें केंद्रीय फर्टिलाइजर टेस्टिंग लैब फरीदाबाद और कृषि मंत्रालय के भी अधिकारी थे। इन टीमों ने एक साथ ईएमएम डीइइ प्लाईवुड इंडस्ट्रीज जोड़ियां फर्कपुर, श्री बालाजी इंडस्ट्री जोड़िया फर्कपुर, औद्योगिक क्षेत्र स्थित ग्लोब पैनल इंडस्ट्रीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नीलगिरी प्लाईवुड जोड़ियां फर्कपुर, राधा कृष्ण प्लाई एंड बोर्ड इंडस्ट्रीज बाडी माजरा व यूनाइटेड प्लाईवुड साबापुर में रेड की। इनमें से टेक्निकल यूरिया के चार सैंपल और ग्लू के दो सैंपल लेकर लैब में भेजे गए। आरोप है कि ईएमएम डीइइ प्लाईवुड इंडस्ट्रीज जोड़ियां फर्कपुर, श्री बालाजी इंडस्ट्री जोड़िया फर्कपुर, यूनाइटेड प्लाईवुड साबापुर ने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया। ऐसे में इनके संचालकों के खिलाफ थाने में केस दर्ज कराया गया है।
तीन फैक्टरियों में स्टॉक की नहीं कर सकेंगे बिक्री
ग्लोब पैनल इंडस्ट्रीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नीलगिरी प्लाईवुड जोड़ियां फर्कपुर और राधा कृष्ण प्लाई एंड बोर्ड इंडस्ट्रीज बाडी माजरा में जो स्टॉक मिला था, उसके प्रयोग व बिक्री को बंद करने का नोटिस फैक्टरी संचालकों को दिया गया है। साथ ही इनके स्टाक पर भी पुलिस का पहरा लगाया गया है।
जाम के लिए मजदूरों को उकसाया गया
बीते रोज शुक्रवार को सड़कों पर जो जाम लगाया गया, उसमें फैक्टरी संचालकों की संख्या कम व मजदूरों की संख्या ज्यादा थी। माना जा रहा है कि फैक्टरी संचालकों ने जाम और प्रदर्शन के लिए मजदूरों को उकसाया था और केंद्र व राज्य की टीमों का विरोध करने के लिए मजदूरों का सहारा लिया गया।